लोहरदगा: लोहरदगा प्रीमियर लीग (LPL) 2026 का आयोजन स्थानीय फुटबॉल प्रतिभाओं को बड़ा मंच देने के उद्देश्य के साथ संपन्न हुआ. नदिया हिन्दू हाई स्कूल के मिनी स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे. स्टेडियम में युवाओं, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की मौजूदगी ने फुटबॉल के प्रति क्षेत्र के उत्साह को सामने रखा.


सांसद सुखदेव भगत ने LPL को अपने लंबे समय से देखे गए सपने का साकार रूप बताते हुए कहा कि लोहरदगा और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें बड़े स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर कम मिलता है. इसी सोच के साथ लोहरदगा में बड़े स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित करने की पहल की गई. आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष अभिनव सिद्धार्थ और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
विदेशी खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरी स्थानीय प्रतिभाएं
LPL की खासियत यह रही कि इसमें स्थानीय खिलाड़ियों के साथ दक्षिण अफ्रीका के विदेशी खिलाड़ियों तथा मणिपुर, पश्चिम बंगाल और अन्य क्षेत्रों से आए अनुभवी खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया. सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि स्थानीय युवाओं को इन खिलाड़ियों के साथ केवल मैदान पर खेलने का अवसर नहीं मिला, बल्कि ड्रेसिंग रूम साझा करने और उनकी फिटनेस, तकनीक, अनुशासन तथा खेल की तैयारियों को करीब से समझने का भी मौका मिला.

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्थानीय खिलाड़ियों को भविष्य में बड़े क्लबों, राज्य स्तरीय टीमों और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के अवसर मिलें. ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में वे सहयोग करेंगे.
खेल से युवाओं को नशे से दूर रखने का संदेश
सुखदेव भगत ने खेल को युवाओं के सकारात्मक विकास से जोड़ते हुए कहा कि युवा जितना खेल के मैदान से जुड़ेंगे, उतना ही नशे और गलत रास्ते से दूर रहेंगे. फुटबॉल जैसे टीम गेम युवाओं में अनुशासन, टीम वर्क और प्रतिस्पर्धा की सकारात्मक भावना विकसित करते हैं. टूर्नामेंट के दौरान दक्षिण अफ्रीका, मणिपुर, बंगाल और झारखंड से पहुंचे खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण अलग-अलग क्षेत्रों की खेल संस्कृति का भी संगम देखने को मिला.

सांसद ने कहा कि LPL को केवल एक फुटबॉल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि इसे ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने का मंच बनाना लक्ष्य है. अपने संबोधन का समापन उन्होंने इन पंक्तियों के साथ किया, “मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है.”


