बोकारो: सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र में सामने आए मामले से सबक लेने के बजाय झारखंड पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. ताजा मामला बोकारो के चास थाना क्षेत्र का है, जहां 15 वर्षीय नाबालिग ने अपने सौतेले पिता पर प्रताड़ना और अश्लील हरकत करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. हैरानी की बात यह है कि पीड़िता की मां पर भी बेटी की शिकायत को नजरअंदाज कर अपने पति का साथ देने का आरोप है.


परिजनों के अनुसार, नाबालिग ने पूर्व में महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि उसकी मां के हस्तक्षेप के बाद मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. परेशान बच्ची ने अपनी आपबीती दादा-दादी और चाचा को सुनाई. इसके बाद जब उसके चाचा शिकायत लेकर चास थाना पहुंचे तो आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) जाने की सलाह दे दी.
परिजनों का कहना है कि CWC पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि नियमानुसार पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और आवश्यक प्रक्रिया के तहत उसे समिति के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए. समिति ने सीधे रेस्क्यू के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही.
सवाल यह है कि जब एक नाबालिग अपने ही घर में यौन उत्पीड़न की आशंका जता रही है, तब उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा ? पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिग के यौन उत्पीड़न की शिकायत पर पुलिस की कानूनी जिम्मेदारियां निर्धारित हैं. ऐसे में शिकायत दर्ज करने के बजाय परिजनों को दूसरे कार्यालय भेजने के आरोप गंभीर हैं और इनकी जांच आवश्यक है.
फिलहाल पुलिस और CWC के बीच समन्वय के अभाव के आरोपों ने बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए और बच्ची के साथ कोई अनहोनी हुई तो जवाबदेही किसकी होगी ? इस मामले में चास पुलिस, CWC और पीड़िता की मां का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है.

