सरायकेला: राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र का विकास केवल एक खूबसूरत भवन खड़ा करने तक सीमित नहीं होना चाहिए. भवन के साथ उसे संचालित करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन, नियमित प्रशिक्षण और छऊ की पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने की व्यवस्था भी जरूरी है. जिला खेल पदाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में छऊ कलाकारों ने इसी सोच के साथ केंद्र के समग्र विकास का प्रस्ताव सरकार को भेजने की मांग उठाई.


बैठक में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बहुउद्देशीय कलाभवन और कला केंद्र के संसाधनों के लिए करीब 50 लाख रुपये के प्रस्ताव पर चर्चा हुई. कलाकारों ने कलाभवन की आवश्यकता का समर्थन किया, लेकिन कहा कि केवल निर्माण और संसाधन उपलब्ध करा देने से कला केंद्र का उद्देश्य पूरा नहीं होगा.
छह स्थायी और 16 आउटसोर्सिंग पद भी एजेंडे में
बैठक में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए छह स्थायी और 16 आउटसोर्सिंग पदों के सृजन का प्रस्ताव भी सरकार के समक्ष भेजने की मांग प्रमुखता से उठी.
कलाकारों का तर्क था कि प्रशिक्षण, प्रशासनिक कार्य, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन और कलाकारों से जुड़ी गतिविधियों को नियमित रूप से चलाने के लिए पर्याप्त कर्मियों की जरूरत होगी. भवन तैयार हो जाए और उसे संचालित करने के लिए जरूरी मानव संसाधन ही उपलब्ध न हों तो अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं किया जा सकेगा.
इसी वजह से कलाकार पद सृजन को महज प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय कला केंद्र के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में देख रहे हैं.
गुरु-शिष्य परंपरा को बचाने पर विशेष जोर
चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छऊ की गुरु-शिष्य परंपरा और नई पीढ़ी के प्रशिक्षण से जुड़ा रहा. कलाकारों ने कहा कि छऊ की बारीकियों को केवल भवन या पुस्तकीय ज्ञान के माध्यम से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. इसके लिए अनुभवी गुरुओं का मार्गदर्शन और नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था जरूरी है.
कलाकारों की मांग है कि सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में आधारभूत संरचना के साथ प्रशिक्षण और पारंपरिक कला हस्तांतरण की ठोस व्यवस्था भी शामिल की जाए, ताकि नई पीढ़ी को छऊ सीखने के लिए स्थायी मंच मिल सके.
पहले भी उठ चुकी है चारों बिंदुओं को साथ रखने की मांग
इससे पहले उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी कलाकारों ने केंद्र के समग्र विकास से जुड़े चारों बिंदुओं को शामिल कर सरकार को प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया था. इसके बाद आपसी सहमति बनाने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया.
इसी क्रम में 7 अगस्त को बैठक हुई थी. अब जिला खेल पदाधिकारी की अध्यक्षता में दोबारा बैठक कर प्रस्ताव और कलाकारों के सुझावों पर मंथन किया गया.
बैठक में तय हुआ कि कलाकार आपस में विचार-विमर्श कर चारों बिंदुओं पर सामूहिक सहमति पत्र तैयार करेंगे और उसे उपायुक्त को सौंपेंगे. इसके बाद जिला प्रशासन के स्तर से आगे की प्रक्रिया की अपेक्षा की जा रही है.
कलाकार बोले- विरोध नहीं, व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
कलाकारों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य प्रस्तावित कलाभवन अथवा सरकार की पहल का विरोध करना नहीं है. उनकी मांग है कि जब राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के विकास की योजना बनाई जा रही है तो भवन, संसाधन, मानव शक्ति और प्रशिक्षण व्यवस्था को एक साथ विकसित किया जाए.
बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी, नगर पंचायत उपाध्यक्ष अविनाश कवि, आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला मोहंती, पूर्व निदेशक एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु तपन पटनायक, बजेंद्र पटनायक, वरिष्ठ मुखौटा गुरु सुशांत महापात्र, वरिष्ठ संगीत गुरु नाथू महतो, निवारण महतो, बावरी बंधु महतो, आशीष कर, कामेश्वर भोल और तरुण भोल सहित अन्य कलाकार मौजूद रहे.
अब छऊ केंद्र के विकास का सवाल केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि परियोजना पर कितनी राशि खर्च होगी. कलाकारों की मांग का केंद्र यह है कि बनने वाला संस्थान कितना जीवंत, व्यवस्थित और आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए उपयोगी होगा.
प्रमोद सिंह (संपादक)

