चांडिल: कुकड़ू अंचल कार्यालय में SIR के दावा- आपत्ति से जुड़े दस्तावेज जमा करने को लेकर हुए विवाद ने अब ईचागढ़ की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. 12 सितंबर को कुकड़ू अंचल कार्यालय में खास समुदाय के ग्रामीणों और सीओ के बीच विवाद तथा कागजात फाड़े जाने के आरोप के बाद पुलिस की तैनाती तक की नौबत आई थी. जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी ने भी कुकड़ू और ईचागढ़ में चल रही SIR दावा-आपत्ति प्रक्रिया का निरीक्षण किया है.


इसी विवाद के बीच आजसू नेता और 2024 विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ से एनडीए प्रत्याशी रहे हरेलाल महतो के बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. महतो ने अंचल अधिकारी की कार्रवाई का समर्थन करते हुए आरोप लगाया है कि एक खास समुदाय के कुछ लोग गलत वंशावली के आधार पर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने इन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया बताते हुए कपाली में भी मतदाता सत्यापन में विशेष सावधानी बरतने की मांग की है.
हालांकि, कुकड़ू विवाद में जिन लोगों को लेकर हरेलाल महतो ने बांग्लादेशी घुसपैठ का आरोप लगाया है, उनके विदेशी या बांग्लादेशी नागरिक होने की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है. इसलिए इसे हरेलाल महतो का राजनीतिक आरोप ही माना जाना चाहिए, स्थापित तथ्य नहीं.
हरेलाल के बयान से क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा ?
इस बयान की राजनीतिक अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि हरेलाल महतो ईचागढ़ में आजसू के प्रमुख चेहरों में हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में आजसू ने उन्हें ईचागढ़ से प्रत्याशी बनाया था. उस चुनाव में वह झामुमो की सविता महतो के मुकाबले दूसरे स्थान पर रहे थे. उपलब्ध चुनावी रिपोर्ट के अनुसार सविता महतो को 76,830 और हरेलाल महतो को 50,222 वोट मिले थे. कुकड़ू विवाद पर स्थानीय राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग दिखाई दे रही हैं. ऐसे में हरेलाल महतो का CO और मतदाता सत्यापन की सख्त प्रक्रिया के समर्थन में उतरना ईचागढ़ में राजनीतिक ध्रुवीकरण की नई बहस को जन्म दे रहा है.
क्या यह आजसू की लाइन है या हरेलाल महतो का अपना स्टैंड ?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है. हरेलाल महतो के बयान को स्वतः पूरी आजसू पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं माना जा सकता. इस विशेष कुकड़ू प्रकरण को ‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ से जोड़ने वाला आजसू का कोई प्रदेश स्तरीय आधिकारिक दस्तावेज या बयान उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला. दूसरी ओर, यह भी तथ्य है कि 2024 में आजसू और भाजपा ने एनडीए सहयोगी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था और ईचागढ़ सीट गठबंधन में आजसू के हिस्से आई थी. ऐसे में किसी मुद्दे पर दोनों दलों के नेताओं की भाषा या राजनीतिक रुख में समानता अपने आप में दल बदलने का प्रमाण नहीं है.
क्या हरेलाल महतो का आजसू से मोहभंग हो रहा है ?
फिलहाल इसका कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं है. हरेलाल महतो ने आजसू छोड़ने, भाजपा में जाने या किसी दूसरे राजनीतिक विकल्प की ओर बढ़ने की सार्वजनिक घोषणा की हो, यह केवल कयासों तक सिमित है. बुधवार को उनका ‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ संबंधी बयान सामने आने के बाद उनके संभावित दल- बदल का निष्कर्ष निकाला जा सकता है. हालांकि आजसू के संगठन के भीतर सरायकेला- खरसावां में पहले भी असंतोष सामने आया है. 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की जिला युवा इकाई के अध्यक्ष सन्नी सिंह ने अपनी टीम के साथ इस्तीफा दिया था और उस समय हरेलाल महतो की कार्यशैली को लेकर भी आरोप लगाए गए थे. इतना ही नहीं सन्नी के बाद जिलाध्यक्ष सचिन महतो ने भी चुनाव के ठीक पहले इस्तीफा देकर झामुमो का दामन थाम लिया था. उसके बाद से दोनों पदो पर पार्टी ने किसी का चयन नहीं किया है.
ईचागढ़ में इस बयान के मायने
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कुकड़ू SIR विवाद अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है. हरेलाल महतो के बयान ने इसमें घुसपैठ और नागरिकता का राजनीतिक विमर्श जोड़ दिया है. दूसरी ओर, प्रभावित लोगों के पक्ष में खड़े नेताओं की अपनी दलीलें हैं. जेएलकेएम नेता तरुण महतो और पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष माझी साव प्रभावित लोगों के पक्ष में खुलकर सामने आ गए हैं और सीओ की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है.
आने वाले दिनों में दो बातें इस बहस की दिशा तय कर सकती हैं- पहली, प्रशासन कुकड़ू विवाद और संबंधित मतदाताओं के दस्तावेजों पर आधिकारिक रूप से क्या स्थिति स्पष्ट करता है. दूसरी, आजसू का प्रदेश नेतृत्व हरेलाल महतो के बयान को पार्टी की लाइन के रूप में स्वीकार करता है या इसे उनका व्यक्तिगत राजनीतिक रुख मानता है. इसलिए अभी ‘हरेलाल महतो आजसू छोड़ने वाले हैं’ या ‘आजसू ने घुसपैठ को अपना नया एजेंडा बना लिया है’ कहना उपलब्ध तथ्यों से आगे की बात होगी. लेकिन कुकड़ू विवाद के बाद हरेलाल के बयान ने ईचागढ़ में यह राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में आजसू और उसके स्थानीय नेतृत्व की रणनीति किस दिशा में जाएगी.

