सरायकेला: राजनगर से सरायकेला को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क इन दिनों अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है. सड़क पर जगह-जगह बने बड़े और गहरे गड्ढों के बीच लगातार भारी वाहनों का परिचालन आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. खासकर सरंगपोसी, मझला दावना और सिदमा के आसपास सड़क की हालत को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. स्थिति ऐसी है कि लोगों के बीच अब सवाल उठ रहा है कि यहां सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क बची है.


ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर सुबह से देर रात तक भारी वाहनों का दबाव बना रहता है. लगातार भारी वाहनों के परिचालन से सड़क तेजी से क्षतिग्रस्त हुई है. कई स्थानों पर गड्ढे इतने बड़े हो चुके हैं कि भारी वाहन तक फंस रहे हैं. ट्रेलर पलटने जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं. इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से ग्रामीण प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.
बरसात के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है. गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता. खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी हो जाती है. धूल, गड्ढे और भारी वाहनों के बीच छोटे वाहनों तथा पैदल राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो रहा है.
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर है. सुबह स्कूल जाने और छुट्टी के बाद लौटने के समय भी सड़क पर भारी वाहन चलते रहते हैं. बच्चों को इन्हीं वाहनों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है. ग्रामीणों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा.
ग्रामीणों ने सरायकेला- खरसावां के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर सड़क का अविलंब निर्माण एवं जर्जर हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है. इसके साथ ही सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की मांग की गई है. आवेदन की प्रतिलिपि जिला परिवहन पदाधिकारी तथा सरायकेला और राजनगर थाना प्रभारियों को भी दी गई है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क के पूर्ण निर्माण में समय लगता है तो तत्काल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई जाए और तब तक भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित किया जाए. प्रशासन को सड़क का स्थल निरीक्षण कर जमीनी स्थिति देखनी चाहिए. केवल पत्राचार और कागजी कार्रवाई से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी.
कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे ग्रामीण
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे. जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर भारी वाहनों का परिचालन रोकेंगे. उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले लोगोंऔरस्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कराना है.
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, भारी वाहन लगातार दौड़ रहे हैं और ट्रेलर तक पलट रहे हैं, तो प्रशासन आखिर किस बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है. क्या किसी बच्चे या राहगीर की जान जाने के बाद व्यवस्था जागेगी ?
राजनगर- सरायकेला मार्ग की बदहाली अब केवल सड़क मरम्मत का मुद्दा नहीं रह गई है. यह जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है. ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से तत्काल कदम उठाएं. अब नजर प्रशासन पर है कि वह ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करता है या सड़क की बदहाली के खिलाफ लोगों को आंदोलन के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

