चांडिल: सरायकेला- खरसावां जिले के कपाली नगर परिषद क्षेत्र में विकास के दावों के बीच जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है. 21 वार्डों में फैले नगर परिषद क्षेत्र के कई इलाकों में सड़क, नाली, जलजमाव, साफ- सफाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं. कहीं सड़कें जर्जर हैं तो कहीं बारिश में जलजमाव और कीचड़ लोगों का रास्ता रोक रहा है. सबसे चिंताजनक तस्वीर उन इलाकों की है, जहां कथित तौर पर बांस-बल्ली के सहारे बिजली के तार घरों तक पहुंचाए गए हैं.


ताजा मामला हांसाडुगरी स्थित कपाली नगर परिषद कार्यालय के गेट के समीप का बताया जा रहा है. यहां कच्ची और जर्जर सड़क के दोनों ओर झाड़ियां उगी हुई हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक इसी इलाके में कई जगह बिजली के तारों को घरों तक पहुंचाने के लिए बांस-बल्ली का सहारा लिया गया है. इससे बारिश और तेज हवा के दौरान हादसे का खतरा भी बना रहता है.
नगर परिषद कार्यालय के पास ही बदहाली तो बाकी इलाकों का क्या हाल ?
सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिस नगर परिषद प्रशासन पर पूरे क्षेत्र में नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, उसके कार्यालय के आसपास ही सड़क और साफ-सफाई की ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं का असर कागजों के बजाय जमीन पर दिखाई देना चाहिए.

कपाली के विभिन्न वार्डों से समय- समय पर जर्जर सड़क, नाली, जलजमाव, स्ट्रीट लाइट और साफ- सफाई से संबंधित समस्याएं सामने आती रही हैं. बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है. पानी और कीचड़ जमा होने से स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी होती है. सड़क किनारे बढ़ी झाड़ियां भी समस्या को और गंभीर बना रही हैं.
बांस- बल्ली पर बिजली के तार, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
बांस- बल्ली के सहारे बिजली के तार ले जाने की कथित व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता पैदा करती है. बारिश या तेज हवा में तार टूटने अथवा नीचे गिरने की स्थिति में गंभीर हादसा हो सकता है. लोगों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा के लिए सुरक्षित और स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए. संबंधित बिजली विभाग को ऐसे स्थानों का सर्वे कर आवश्यकता के अनुसार पोल और तार की व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.
हालांकि बिजली के पोल और विद्युत तारों की व्यवस्था सीधे नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र का विषय है या बिजली विभाग का, यह प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट किया जाना चाहिए. लेकिन नागरिकों की सुरक्षा के मद्देनजर नगर परिषद और संबंधित विभाग के बीच समन्वय कर समस्या का समाधान जरूरी है.
जनता का सवाल- आखिर कब बदलेगी कपाली की तस्वीर ?
कपाली की जनता अब सवाल उठा रही है कि आखिर कब तक जलजमाव, कीचड़, जर्जर सड़कों, साफ- सफाई की समस्या और अस्थायी बिजली व्यवस्था के बीच रहना पड़ेगा. क्या जर्जर सड़कों का निर्माण होगा ? क्या जलजमाव का स्थायी समाधान निकलेगा ? क्या खतरनाक तरीके से ले जाए गए बिजली तार व्यवस्थित किए जाएंगे ? और क्या नगर परिषद के सभी 21 वार्डों में बुनियादी सुविधाएं समान रूप से पहुंचेंगी ?
अब निगाहें कपाली नगर परिषद प्रशासन और संबंधित विभागों पर हैं. लोगों को किसी ‘मसीहा’ का नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था और बुनियादी नागरिक सुविधाओं का इंतजार है. सवाल यही है कि कपाली की तस्वीर आखिर कब बदलेगी ?

