सरायकेला: खरसावां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), बुरूडीह में चल रही नामांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए गुरुवार को अभ्यर्थियों ने अभिभावकों के साथ सरायकेला- खरसावां मुख्य मार्ग को जाम कर दिया. अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग और नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितता का आरोप लगाया. हालांकि संस्थान के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निर्धारित गाइडलाइन और उपलब्ध सीटों के अनुसार ही नामांकन किया जा रहा है.


आक्रोशित अभ्यर्थियों का आरोप था कि काउंसलिंग के दौरान स्पष्ट नीति का पालन नहीं किया जा रहा है और सीरियल नंबर के अनुसार नामांकन नहीं हो रहा है. उनका आरोप था कि संस्थान अपने स्तर से काउंसलिंग कर अभ्यर्थियों का नामांकन ले रहा है. इसी को लेकर अभ्यर्थी और उनके अभिभावक ITI के सामने सड़क पर उतर आए.
दोपहर करीब 12:30 बजे अभ्यर्थियों ने बुरूडीह के समीप सरायकेला-खरसावां मुख्य मार्ग पर आवागमन अवरुद्ध कर दिया. इससे करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहा. गुरुवार को खरसावां का साप्ताहिक हाट होने के कारण सड़क पर वाहनों का दबाव भी अधिक था और जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई.

घटना की सूचना मिलने पर खरसावां थाना प्रभारी राहुल सिंह मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत कर उनकी बात सुनी और समझा- बुझाकर सड़क जाम समाप्त कराया. करीब 1:30 बजे जाम हटने के बाद मुख्य मार्ग पर आवागमन सामान्य हो सका.
प्राचार्य बोले- 180 सीटों पर नामांकन पूरा, कोई अनियमितता नहीं
इधर, बुरूडीह ITI के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों के आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से नामांकन को लेकर काउंसलिंग चल रही है और सभी निर्धारित गाइडलाइन का अनुपालन किया जा रहा है. गुरुवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी काउंसलिंग के लिए पहुंचे थे और क्रमवार प्रक्रिया चल रही थी.
प्राचार्य के मुताबिक 180 सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांकन में किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है और उपलब्ध सीटों के अनुसार ही पूरी प्रक्रिया संचालित की गई है.
एक तरफ अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग की प्रक्रिया और क्रम को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ संस्थान प्रबंधन ने नियमों के अनुरूप नामांकन किए जाने की बात कही है. ऐसे में अभ्यर्थियों की शिकायतों और संस्थान प्रबंधन के दावे के बीच वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी.

