जामताड़ा:जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. सोमवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वास्थ्य सूचकांकों की प्रखंडवार समीक्षा की गई. कई सूचकांकों में प्रदर्शन असंतोषजनक पाए जाने पर उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार लाने का निर्देश दिया.


बैठक के दौरान उपायुक्त ने ‘स्ट्रेटेजिक प्लान फॉर टीबी फ्री जामताड़ा’ का विमोचन किया. इसके साथ ही 100 दिवसीय टीबी अभियान, एनवीबीडीसीपी, एनएलईपी, मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, यूविन और एनसीडी सहित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई. उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्य करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के सूचकांकों में अपेक्षित सुधार लाने का निर्देश दिया.
रिपोर्टिंग में लापरवाही पर वेतन कटौती. एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान कई स्वास्थ्य केंद्रों से प्रतिदिन समय पर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड नहीं किए जाने पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई. उन्होंने निर्देश दिया कि जिस दिन किसी स्वास्थ्य केंद्र की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होगी, उस दिन संबंधित सीएचओ और एएनएम को अनुपस्थित मानते हुए वेतन कटौती की कार्रवाई की जाए. उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े किसी भी कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सभी एमओआईसी को प्रत्येक 15 दिन में अपने स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया. बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को प्रोत्साहित करने और खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मियों के कार्य में सुधार सुनिश्चित करने को कहा गया.
नाला सीएचसी के कर्मी पर कार्रवाई. सीएचसी स्तर पर आयोजित बैठकों की कार्यवाही नहीं भेजने और कार्य में शिथिलता बरतने के मामले में नाला सीएचसी के मलेरिया तकनीकी पर्यवेक्षक का वेतन बंद करने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने संबंधित कर्मी को दो दिनों के भीतर कार्यशैली में सुधार लाने का निर्देश दिया. साथ ही एमओआईसी को पूरे मामले की जांच कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा.
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर. बैठक में गर्भधारण के शुरुआती चरण में महिलाओं के पंजीकरण, एएनसी जांच, संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई. बीसीजी और हेपेटाइटिस-बी बर्थ डोज के कवरेज को बेहतर बनाने का निर्देश दिया गया. निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का भी समय पर टीकाकरण सुनिश्चित कराने को कहा गया.
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि निजी अस्पतालों द्वारा टीकाकरण के नाम पर अवैध राशि वसूली की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. फुल और कंप्लीट इम्यूनाइजेशन की शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने के साथ ही परिवार नियोजन को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया.
अस्पतालों में सफाई और दवाओं की उपलब्धता पर जोर. उपायुक्त ने अस्पतालों में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता और दवाओं के स्टॉक के नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए.
उपायुक्त ने बताया कि प्रोबेशनर डिप्टी कलेक्टर द्वारा सदर अस्पताल का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है. आने वाले दिनों में सीएचसी और पीएचसी का भी औचक निरीक्षण किया जा सकता है. उन्होंने स्वयं भी जिले के स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण करने की बात कही.
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. एसके मिश्रा, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. दिनेश प्रसाद, सभी संबंधित एमओआईसी, डीपीएम सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

