सरायकेला: नीमडीह थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग और पश्चिम बंगाल उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार को छापेमारी कर तीन अवैध चुलाई भट्ठियों को ध्वस्त किया. इस दौरान टीम ने करीब 1500 किलोग्राम जावा महुआ और 50 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद की. कार्रवाई के बाद संबंधित संचालकों के खिलाफ झारखंड उत्पाद अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज करने की बात कही गई है.


आसूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे लाकड़ी और चतरमा गांव में छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान अवैध शराब बनाने के लिए संचालित तीन भट्ठियों को नष्ट किया गया. टीम ने मौके से भारी मात्रा में जावा महुआ और तैयार महुआ शराब बरामद की.
हालांकि, कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि अवैध शराब के इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य कारोबारी आखिर कब पुलिस और उत्पाद विभाग की पकड़ में आएंगे. लगातार छापेमारी के बावजूद मुख्य कारोबारियों की गिरफ्तारी नहीं होने से कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
विभागीय सूत्रों के अनुसार, छापेमारी से पहले ही अवैध शराब कारोबारियों को कार्रवाई की भनक लग जाने के कारण आरोपी मौके से फरार हो जाते हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद लगातार कार्रवाई के बाद भी कारोबारियों के हाथ नहीं लगने से कई सवाल उठ रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में बार-बार अवैध शराब की भट्ठियां पकड़ी जा रही हैं, वहां कार्रवाई के कुछ दिनों बाद फिर से कारोबार शुरू होने की चर्चा सामने आती है. ऐसे में केवल भट्ठियां ध्वस्त करने और जावा महुआ जब्त करने के बजाय इस अवैध कारोबार के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है.
उत्पाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध शराब निर्माण के ठिकानों को नष्ट करने के साथ ही इस कारोबार के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना है. जब तक कारोबारियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक एक भट्ठी टूटने के बाद दूसरी भट्ठी शुरू होने की आशंका बनी रहेगी.
उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज ने कहा कि अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. इस कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
अब सवाल यह है कि अगली कार्रवाई में केवल अवैध शराब की भट्ठियां ध्वस्त होंगी या फिर इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य आरोपी भी कानून के शिकंजे में आएंगे. नीमडीह के सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही कार्रवाई के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण बना हुआ है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

