सरायकेला: आस्था, सेवा और परंपरा के पांच दशक पूरे होने पर प्राचीन कुदरसाईं शिव मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर आयोजित विशाल भंडारा श्रद्धा और सेवा का यादगार उदाहरण बन गया. करीब 50 वर्षों से लगातार चली आ रही इस परंपरा में सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया. मंदिर परिसर पूरे दिन ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजता रहा.


पांच दशक पहले शुरू हुई थी भंडारे की परंपरा.
कुदरसाईं शिव मंदिर के विशाल भंडारे की शुरुआत करीब पांच दशक पहले स्वर्गीय रामजी लाल अग्रवाल और उस समय के धर्मपरायण एवं सेवाभावी लोगों ने की थी. श्रद्धा और जनसेवा की भावना से शुरू हुई यह परंपरा पांच दशक बाद भी उसी उत्साह और समर्पण के साथ जारी है. समय के साथ पीढ़ियां बदलीं, लेकिन भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और श्रद्धालुओं की सेवा का भाव आज भी कायम है.
इस वर्ष बाबा बुद्धेश्वर भक्त मंडल की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया. मंडल के सदस्यों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया और पूरे समर्पण के साथ महाप्रसाद का वितरण किया.
मनोज चौधरी ने की पूजा-अर्चना.
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की.
उन्होंने कहा कि कुदरसाईं शिव मंदिर और यहां की सेवा परंपरा से उनका वर्षों पुराना भावनात्मक जुड़ाव है. वर्ष 1996 से लगातार भगवान भोलेनाथ और श्रद्धालुओं की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है.
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वर्गीय रामजी लाल अग्रवाल और उस समय के सेवाभावी लोगों ने जिस श्रद्धा और सेवा भावना के साथ भंडारे की शुरुआत की थी, उसके लिए सभी लोग सदैव उनके कृतज्ञ रहेंगे.
उन्होंने कहा कि इस पुण्य परंपरा के 50 वर्ष पूरे होना पूरे सरायकेला के लिए गौरव का क्षण है. उन्होंने भगवान भोलेनाथ से क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और आपसी भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की.
बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल.
भंडारे में नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी, कैलाश चैतानी, मनोज चौधरी मेडिकल, संजय अग्रवाल, वरुण साहू, हेमकांत मंडल, प्रहलाद साहू, घंटों दास, रिशु दास सहित बाबा बुद्धेश्वर भक्त मंडल के सदस्य, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे.
भंडारे के सफल आयोजन में स्थानीय नागरिकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया. पांच दशक से चली आ रही यह परंपरा अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण, सामाजिक एकता और भाईचारे की मिसाल बन चुकी है.
कुदरसाईं शिव मंदिर का यह भंडारा हर वर्ष नई पीढ़ी को आस्था के साथ मानव सेवा का संदेश देता है. पांच दशक बाद भी वही आस्था, वही सेवा और वही महादेव का जयघोष कुदरसाईं की इस परंपरा को सरायकेला की खास पहचान बना चुका है.
संपादक: प्रमोद सिंह

