आदित्यपुर: आदित्यपुर वृहद शहरी जलापूर्ति योजना को लेकर जिला प्रशासन की सख्ती के बाद अब जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी एजेंसियों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है. सोमवार को समाहरणालय में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में जुडको. जिंदल एवं शापूरजी पालनजी को 31 जुलाई तक विशेष रूप से आदित्यपुर-2 क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए जाने का आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सह आदित्यपुर- गम्हरिया विकास समिति के अध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने स्वागत किया है.



उल्लेखनीय है कि आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति योजना की आधारशिला लगभग आठ वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रखी थी. उस समय परियोजना की स्वीकृत लागत 395.15 करोड़ रुपये थी और इसे तीन वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी योजना आज तक पूरी नहीं हो सकी है. कार्यदायी एजेंसियां लगातार समय विस्तार लेती रही हैं, जबकि लाखों लोगों को अब भी नियमित पेयजल आपूर्ति का लाभ नहीं मिल पाया है.
पिछले महीने जन कल्याण मोर्चा और आदित्यपुर अधिवक्ता संघ ने भी परियोजना में हो रही देरी के खिलाफ धरना- प्रदर्शन किया था. आंदोलन के बाद संबंधित एजेंसियों ने 15 जुलाई तक सीतारामपुर स्थित 30 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आदित्यपुर कॉलोनी में जलापूर्ति शुरू करने का भरोसा दिया था. लेकिन तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी.
योजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा सांपड़ा स्थित 60 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अब भी अधूरा पड़ा है. इसके कारण पूरे परियोजना का लाभ क्षेत्र की जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है. वर्षों से लोग शुद्ध पेयजल की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन बार-बार केवल आश्वासन ही मिल रहा है.
पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि यदि उपायुक्त द्वारा निर्धारित 31 जुलाई की समयसीमा के भीतर आदित्यपुर-2 क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं होती है, तो आदित्यपुर- गम्हरिया विकास समिति आम जनता के सहयोग से चरणबद्ध जन आंदोलन शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में और देरी अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी.





