
सरायकेला: सीनी बक्साईगढ़ में भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और परंपरा के अद्भुत संगम के बीच संपन्न हुई. भगवान बलभद्र. माता सुभद्रा और महाप्रभु जगन्नाथ के भव्य रथ के समक्ष राजा मनोज सिंहदेव ने पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ की पवित्र रस्म निभाई. इसके साथ ही पूरा क्षेत्र “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठा और हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दर्शन कर सुख. शांति और समृद्धि की कामना की.


रथ यात्रा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हरिनाम संकीर्तन के बीच हुई. पूजा-अर्चना के बाद भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा और महाप्रभु जगन्नाथ के विग्रहों को सुसज्जित रथ पर विराजमान कराया गया. इसके बाद रथ नगर भ्रमण के लिए रवाना हुआ.
रथ यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन राजा मनोज सिंहदेव ने किया. उन्होंने विधि-विधान से महाप्रभु की पूजा-अर्चना करने के बाद स्वर्ण झाड़ू से रथ की सफाई की. यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष राजा और प्रजा सभी समान हैं तथा सेवा और विनम्रता ही सर्वोच्च धर्म है.
पूजा के उपरांत राजा मनोज सिंहदेव ने महाप्रभु से क्षेत्र की सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से क्षेत्र निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े और सभी लोगों का जीवन मंगलमय बने.
रथ यात्रा के दौरान महिलाओं. पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों में विशेष उत्साह देखने को मिला. श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया. भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा सीनी बक्साईगढ़ भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा.
रथ यात्रा महोत्सव के सफल आयोजन में स्थानीय समिति. मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा. श्रद्धालुओं ने महाप्रभु जगन्नाथ. भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा से क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की.
प्रमोद सिंह (संपादक)





