
जमशेदपुर: बेंगलुरु स्थित मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र एवं जमशेदपुर के कदमा निवासी लक्ष्य मिश्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. छात्र के पिता अंजनी कुमार की ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सूचीबद्ध कर लिया है. इससे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को नया बल मिला है.


गौरतलब है कि लक्ष्य मिश्रा मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में द्वितीय वर्ष के छात्र थे. कॉलेज प्रशासन ने उनकी मौत को आत्महत्या बताया था. वहीं, परिजनों ने शुरू से ही इस दावे पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
मृतक के पिता अंजनी कुमार, जो भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत हैं, इससे पहले राष्ट्रपति. प्रधानमंत्री. संबंधित राज्य सरकार. झारखंड सरकार. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित विभिन्न सक्षम प्राधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं.
परिजनों का आरोप है कि लक्ष्य मिश्रा की मौत को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया. उनका कहना है कि यदि छात्र ने ऊंचाई से छलांग लगाई होती तो शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और घटनास्थल पर अधिक मात्रा में रक्त के साक्ष्य मिलने चाहिए थे. उनका यह भी कहना है कि घटनास्थल से जुड़े कई पहलुओं की गहन वैज्ञानिक जांच आवश्यक है.
परिवार ने यह आरोप भी लगाया है कि घटना की सूचना पुलिस को देर से दी गई और फॉरेंसिक टीम के पहुंचने से पहले घटनास्थल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है. हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी जांच होना बाकी है.
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर चुका है. वहीं, परिजनों का कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका सूचीबद्ध होने से उन्हें निष्पक्ष जांच और न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है. फिलहाल मामले की जांच प्रक्रिया जारी है. आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा.





