रांची: झारखंड की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर रविवार को विराम लग गया. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर बनी असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस के झारखंड प्रभारी भूपेश बघेल के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद महागठबंधन ने संयुक्त रूप से राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है.


रविवार शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास पर महागठबंधन की बैठक आयोजित की गई. बैठक में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा माले के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया. बैठक के बाद महागठबंधन की ओर से संयुक्त प्रेस वार्ता कर राज्यसभा चुनाव को लेकर साझा रणनीति की घोषणा की गई.
संयुक्त प्रेस वार्ता में झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता विनोद पांडे, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, राजद की ओर से मंत्री संजय प्रसाद यादव तथा भाकपा माले की ओर से सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो मौजूद रहे. नेताओं ने स्पष्ट किया कि महागठबंधन पूरी एकजुटता और मजबूती के साथ राज्यसभा चुनाव मैदान में उतरेगा.
महागठबंधन के नेताओं ने बताया कि झामुमो राज्यसभा की दूसरी सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी और कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगी. गठबंधन की ओर से झामुमो के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को संयुक्त उम्मीदवार बनाया गया है. दोनों उम्मीदवार सोमवार सुबह 11 बजे नामांकन दाखिल करेंगे.
प्रेस वार्ता में नेताओं ने दावा किया कि जिस तरह महागठबंधन ने विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी, उसी तरह राज्यसभा चुनाव में भी दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सभी विधायक महागठबंधन के दोनों उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर चल रही सभी अटकलों पर विराम लग गया है. साथ ही विपक्ष को भी स्पष्ट संदेश गया है कि झामुमो, कांग्रेस, राजद और माले आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना संयुक्त रूप से करने के लिए तैयार हैं.



