आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर विद्युत अवर प्रमंडल अंतर्गत कुलुपटांगा फीडर से जुड़े हजारों उपभोक्ता पिछले करीब 17 घंटे से भीषण बिजली संकट झेल रहे हैं. शुक्रवार शाम करीब 4 बजे से बाधित हुई बिजली आपूर्ति शनिवार सुबह 10 बजे तक भी बहाल नहीं हो सकी, जिससे लोगों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है.

बिजली विभाग के अनुसार तेज आंधी के कारण NIT के समीप से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन के दो पोल गिर गए. इसके अलावा कई पेड़ और उनकी बड़ी टहनियां बिजली तारों पर गिर गईं, जिससे पूरा फीडर ठप हो गया. विभागीय कर्मी पूरी रात मरम्मत कार्य में जुटे रहे, लेकिन लंबे समय बाद भी बिजली बहाल नहीं हो सकी.
उधर भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली गुल रहने से आम लोगों की परेशानी चरम पर पहुंच गई है. घरों में लगे इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं, जबकि मोटर नहीं चल पाने के कारण पानी की भी गंभीर किल्लत उत्पन्न हो गई है. कई इलाकों में लोग पूरी रात गर्मी और मच्छरों के बीच जागने को मजबूर रहे. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में ऐसी बदहाल स्थिति कभी नहीं बनी. उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग लगभग हर दिन मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली काटता है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था में कोई सुधार दिखाई नहीं देता. लोगों का सवाल है कि आखिर रोज-रोज होने वाले मेंटेनेंस का फायदा क्या है, जब हल्की आंधी और बारिश में ही पूरी बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है. अब क्षेत्र में बिजली व्यवस्था के नाम पर चल रहे कथित आधुनिकीकरण कार्यों पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं. लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बिजली व्यवस्था पहले से और बदहाल होती जा रही है. उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड में आधुनिकीकरण और मेंटेनेंस के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते ट्रांसमिशन लाइन, पोल और पेड़ों की नियमित मॉनिटरिंग की जाती तो इतनी बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं होती. लोगों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
गौरतलब है कि पिछले दिनों बिजली और पानी की समस्या को लेकर भाजपा द्वारा राज्यभर में विरोध प्रदर्शन भी किया गया था. बावजूद इसके हालात में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा. अब उपभोक्ताओं में यह भावना गहराने लगी है कि न सरकार उनकी परेशानियों को गंभीरता से ले रही है और न ही विभाग जवाबदेही तय कर पा रहा है.
सबसे बड़ी चिंता यह है कि विभागीय अधिकारी अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि बिजली आपूर्ति आखिर कब तक सामान्य हो पाएगी. इससे लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग केवल बिल वसूली में सक्रिय रहता है, लेकिन सुविधाओं और आपात स्थिति में राहत देने के मामले में पूरी व्यवस्था फेल साबित हो रही है.
सवाल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जनप्रतिनिधि छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान करवाकर बड़े-बड़े दावे और प्रचार तो कर लेते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. जनता अब वास्तविक विकास और मजबूत बिजली व्यवस्था की मांग कर रही है. लोगों का कहना है कि आदित्यपुर में बिजली और पानी को लेकर जनआक्रोश का इतिहास पुराना रहा है. यदि समय रहते सरकार, विभाग और जिम्मेदार अधिकारी नहीं चेते तो आने वाले दिनों में यह नाराजगी बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है. फिलहाल हजारों उपभोक्ता गर्मी, पानी संकट और बदहाल बिजली व्यवस्था के बीच त्राहिमाम की स्थिति में जीने को मजबूर हैं.



