सरायकेला: नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म मामले ने प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. मामले को लेकर अब एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है- आखिर आरोपी अधिकारी को बचा कौन रहा है, सिस्टम या सरकार !

सूत्रों का दावा है कि उन्हें एक कद्दावर मंत्री का संरक्षण प्राप्त है, जबकि चक्रधरपुर क्षेत्र से जुड़े होने के कारण दो विधायकों की भी पैरवी सामने आ रही है. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
मामले की बात करें तो कुमारडुंगी की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि समीर बोदरा ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ दुष्कर्म किया. पीड़िता ने फरवरी 2026 में न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए चाईबासा महिला थाना को भेज दिया. कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है. चाईबासा महिला थाना प्रभारी शीला मिंज के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई है.
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है. पुलिस की विशेष टीम सरायकेला और पीड़िता के गांव जाकर कई बार साक्ष्य जुटा चुकी है. साथ ही जांच रिपोर्ट सरायकेला के उपायुक्त को भी भेज दी गई है.
वहीं आरोपी समीर बोदरा ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे पारिवारिक विवाद बताया है. उनका कहना है कि दोनों के बीच शादी की बात चल रही थी और अब उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है. इस बीच बीते 20 अप्रैल को सरायकेला टाउन हॉल में कार्यपालक पदाधिकारी ने गुपचुप तरीके से एक दूसरी महिला से शादी रचा ली, जो चर्चा का विषय बना हुआ है.
फिलहाल मामला संवेदनशील बना हुआ है. प्रशासनिक दबाव, राजनीतिक चर्चा और कानूनी प्रक्रिया के बीच सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है.

