गम्हरिया: प्रखंड में पीडीएस व्यवस्था को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है, जहां डीलर के साथ-साथ जांच करने पहुंची मार्केटिंग ऑफिसर (एमओ) की भूमिका भी कटघरे में आ गई है. आरोप है कि पीडीएस डीलर प्रदीप ठाकुर द्वारा खाद्यान्न वितरण में गंभीर अनियमितता बरती गई. उपभोक्ताओं को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिलने वाला राशन नहीं दिया गया और ई-पॉश स्लिप पर “बाकी” लिखकर उन्हें वापस भेज दिया गया.

सबसे गंभीर आरोप यह है कि डीलर द्वारा उपभोक्ताओं पर दबाव बनाकर यह कहलवाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें राशन मिल गया है. साथ ही बीपीएल श्रेणी से बाहर करने और जुर्माना लगाने की धमकी भी दी जा रही है.
मामला सामने आने के बाद जांच के लिए पहुंची मार्केटिंग ऑफिसर पूनम कुमारी की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि उन्होंने न तो पीड़ित उपभोक्ताओं से ठीक से पूछताछ की और न ही स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया. उल्टा डीलर के करीबी लोगों का बयान लेकर जांच पूरी कर दी गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की जांच से विभागीय मिलीभगत की आशंका और मजबूत होती है. यदि जांच निष्पक्ष होती, तो मौके पर ही कई तथ्य सामने आ सकते थे.
बताया जा रहा है कि संबंधित डीलर पर पहले भी अनियमितता और कालाबाजारी के आरोप लग चुके हैं, लेकिन हर बार प्रभाव के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई. अब एमओ की भूमिका पर सवाल उठने से पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके और पीडीएस व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. फिलहाल इस प्रकरण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है.



