आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिला के प्रशासनिक पदाधिकारियों के कारनामे धीरे- धीरे सरकार के लिए नासूर बनते जा रहे हैं. चाहे जिले के अधिकारी हो या अनुमंडल, प्रखंड, अंचल अथवा निकाय क्षेत्र. इनके अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक खुद को बाबा साहेब अंबेडकर के कानून से ऊपर मान बैठे हैं. यहां तक कि इन्हें न्यायालय और जांच एजेंसियों का भी खौफ नहीं रह गया है. अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. मजे की बात तो ये है कि जब सवाल अधिकारियों से पूछा जाता है तो जवाब भी बड़ा अटपटा और बेतुका दिया जाता है.

हम बात कर रहे हैं आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 17 स्थित भारत सरकार का उपकेंद्र आकाशवाणी केंद्र की. पिछले 48 घंटे से आकाशवाणी केंद्र के सामने की जमीन विवाद को लेकर चर्चा में है. इसका खुलासा तब हुआ ज़ब आकाशवाणी केंद्र के बाहर बने अधूरे पार्क का राजीव कुमार नामक व्यक्ति ने घेराबंदी शुरू की. जिसे आदित्यपुर थाने की पुलिस ने शुक्रवार देर रात जबरन घेराबंदी के लिए लगाए गए बाड़ को तोड़ दिया. विरोध करने पहुंचे राजीव कुमार के साथ बदसलूकी की गई. जबकि इससे पूर्व 14 मई 2025 को अंचल प्रशासन की ओर से उक्त जमीन को लेकर नोटिस चश्पा किया गया था जिसमें 21 मई 2025 तक जमीन के दावेदारी से संबंधित दावा- आपत्ति मांगे गए थे. किसी भी विभाग ने कोई दावा- आपत्ति नहीं किया. तब जाकर राजीव कुमार ने जमीन की घेराबंदी शुरू की. अब जब राजीव कुमार अपनी जमीन की घेराबंदी करना शुरू किया तो आकाशवाणी प्रशासन हरकत में आया आखिर क्यों ? वैसे आकाशवाणी प्रबंधन ने किस आधार पर दावा किया है फिलहाल यह बताने वाला कोई सामने नहीं आया है जबकि राजीव कुमार ने दावा किया है कि 5/7/1982 को डीड संख्या 2773/ 2794 15.5 डिसमिल जमीन उनके पिता ने खरीदा था. उसमें से 7 डिसमिल जमीन आकाशवाणी ने गलत तरीके से कब्जा कर बाउंड्री वॉल कर लिया है जबकि 8.5 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से पार्क का निर्माण कर दिया गया है. इसके में ना तो उनके पिता को मुआवजा दी गई है ना ही जमीन अधिग्रहण से संबंधित कानूनी कार्रवाई पूरी की गई है. इसको लेकर लगभग सभी संबंधित विभागों का चक्कर काट चुका हूं कहीं से भी कोई संतुष्टीजनक जवाब अब तक नहीं मिला है. इसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका डायल करने जा रहा हूं जिसमें सभी संबंधित विभागों को पार्टी बनाऊंगा.
इस बीच अचानक से शनिवार को नगर निगम ने एक नोटिस पत्रांक संख्या 4408 राजीव कुमार को जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि “सरकारी भूखंड (आकाशवाणी मुख्य द्वार एवं आकाशवाणी कॉलोनी परिसर के मुख्य द्वार के बीच पर अवैध बाड़) लगाने के संबंध में). नोटिस में कहा गया है कि इस कार्यालय को प्राप्त शिकायत अनुसार आपके द्वारा सरकारी भूखंड (आकाशवाणी मुख्य द्वार एवं आकाशवाणी कॉलोनी परिसर के मुख्य द्वार के बीच) पर अवैध रूप से बाड़ लगाने का कार्य किया जा रहा है. आपका यह कृत्य झारखंड नगर पालिका अधिनियम 2011 के प्रावधानों का उल्लंघन है. अतः आपको निर्देश दिया जाता है कि तत्काल प्रभाव से कार्य बंद करते हुए प्रश्नगत होल्डिग / प्लॉट से संबंधित दस्तावेजों के साथ दिनांक 29/11/2025 के अपराहन 12:30 बजे अधोहस्ताक्षरी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें अन्यथा आपके विरूद्ध झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम 2011 के सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जायेगी. इसे सख्त ताकीद समझें.
नगर निगम ने राजीव कुमार को नोटिस जारी कर आकाशवाणी के दावे को ही खारिज कर दिया और उक्त जमीन को सरकारी भूखंड घोषित कर दिया. अगर नगर निगम ने ही उक्त जमीन को सरकारी भूखंड घोषित कर दिया तो आकाशवाणी का दावा कैसे बनता है इसकी भी जांच होनी चाहिए. इसको लेकर जब नगर निगम के प्रशासक से हमने पूछा कि किसके शिकायत के आलोक में आपने राजीव कुमार को नोटिस भेजा है ? इसपर उन्होंने कहा कि उपायुक्त ने व्हाट्सएप पर निर्देश दिया है. हमने जब पूछा कि क्या लिखित आदेश मिला है ? इस पर उन्होंने कुछ भी बताना जरूरी नहीं समझा. थाना द्वारा किए गए कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है और फोन काट दिया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर दोषी कौन है राजीव कुमार, आकाशवाणी, पुलिस या नगर निगम प्रशासन ? दस्तावेज किसके पास है और किसकी दावेदारी मजबूत है. सवाल यह उठता है कि इतने दिनों तक नगर निगम प्रशासन कहां था ? क्या अंचल, आवास बोर्ड या जियाडा से पत्राचार कर जमीन से संबंधित जानकारी जुटाया गया है ?
इधर आदित्यपुर पुलिस ने किसके शिकायत पर काम रुकवाया यह पूछे जाने पर थाना प्रभारी के पास में कोई जवाब नहीं था. राजीव कुमार इसकी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचे पुलिस अधीक्षक ने दस्तावेज देखने के बाद थाना प्रभारी से बगैर जांच किए जमीन के मामले में हस्तक्षेप न करने की नसीहत दी. वैसे आदित्यपुर की जनता आज भी यही जानती रही कि उक्त जमीन अयाडा का है. आयडा ने ही उक्त जमीन पर पार्क का निर्माण कराया था. हालांकि पिछले 15 वर्षों से रखरखाव के अभाव में पार्क खंडहर में तब्दील हो चुका है. आकाशवाणी के आसपास की जमीन अतिक्रमण के दर्द से कर रहा है. इसपर आज तक नगर निगम प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस नाटकीय घटनाक्रम का असल विलेन कौन है. वैसे सरायकेला- खरसावां जिला में अब यह किंवदंती बन चुका है कि यहां के प्रशासनिक पदाधिकारी खुद को बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए कानून और न्यायपालिका से ऊपर मान चुके हैं. यही कारण है कि ऐसे दर्जनों मामले फाइलों और सरकारी दफ्तरों में दब चुके हैं जिसकी आड़ में पदाधिकारी लाखों का वारा- न्यारा कर या तो जिलाबदर हो चुके हैं या कहीं और मलाई मार रहे हैं.

