आदित्यपुर/ Parmeshwar Gorai शनिवार को आरआईटी थाने की पुलिस ने बंतानगर में मुकेश प्रजापति उर्फ़ राजा नामक युवक के स्टेशनरी दुकान में औचक छापेमारी करते हुए देश में प्रतिबंधित ई- सिगरेट (e- cigarette) सहित कई नशीले उत्पाद की बड़ी खेप बरामद की है.

हैरानी की बात ये है कि पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जबकि यह एक बड़ा मामला है. आखिर प्रतिबंधित ड्रग्स यानि ई- सिगरेट क्षेत्र में आया कैसे ?समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने FIR दर्ज नहीं किया है.

क्या कहता है क़ानून
1 जून 2019 को हुई ड्रग कंसल्टेटिव कमेटी मीटिंग में एक्स्पर्ट्स ने इस बात की पुष्टि की कि ई-सिगरेट और ऐसी अन्य कई डिवाइस को Drug and Cosmetics Act, 1940 (DCA) के सेक्शन 3 (b) के तहत ड्रग माना जाएगा. लिहाजा DCA के सेक्शन 26 (A) के तहत उन्हें बैन किया जाना चाहिए. ENDS के तहत ई-सिगरेट, हीट-नॉट बर्न डिवाइस, वेप, ई-शीशा, ई-निकोटीन, फ्लेवर्ड हुक्का और ऐसे अन्य प्रोडक्ट्स आते हैं. ई-सिगरेट से हार्ट अटैक का खतरा 56 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इस पर प्रतिबंध लगाने की मंजूरी दे दी है. हेल्थ मिनिस्ट्री ने इस पर प्रतिबंध की वकालत की थी. जिसे देशभर में सितंबर 2019 से लागू कर दिया गया है. इसमें कानून तोड़ने वाले के लिए 5 लाख रुपये जुर्माना और 3 साल तक जेल की सिफारिश की गई है. इसमें ई- हूक्का भी शामिल है. इसकी बिक्री और मैन्युफैक्चरिंग दोनों पर पाबंदी है.
आखिर क्यों प्रतिबंधित है देश में ई- सिगरेट ?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन्हें ड्रग्स मानते हुए और सेहत पर इनके खतरनाक असर को देखते हुए बैन करने का फैसला लिया था. बता दें कि बैटरी ऑपरेटिड सिगरेट को बैन करने का प्रस्ताव नरेंद्र मोदी सरकार के ‘शुरुआती 100 दिनों के एजेंडे’ में शामिल था. ई-सिगरेट जिसे Electronic nicotine delivery system (ENDS) कहा जाता है, धूम्रपान करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय है. ई- सिगरेट्स दरअसल गैर- लाइसेंस वाले प्रोडक्ट्स हैं, जो अवैध रूप से भारत में घुस आए हैं. इसे एक ऐसे प्रोडक्ट के रूप में बेचा जाता है जो लोगों को स्मोकिंग छोड़ने में मदद करते हैं. यही वजह है कि युवाओं के बीच ई-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यह डिवाइस तंबाकू को नहीं जलाती है, बल्कि लिक्विड निकोटीन सॉल्यूशन से धुआं उड़ाने के लिए हीटिंग डिवाइस का इस्तेमाल करती है. इस धुएं को सिगरेट पीने वाला सांस के साथ अंदर लेता है. ई- सिगरेट का सेवन करने से व्यक्ति को डिप्रेशन होने की संभावना दोगुनी हो जाती है. एक शोध के मुताबिक जो लोग ई सिगरेट का सेवन करते हैं, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा 56 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. वहीं लंबे समय तक इसका सेवन करने से ब्लड क्लॉट सकती है.
युवा वर्ग के लिए खतरा
प्रतिबंध के बावजूद झारखंड के सरायकेला जिला के आरआईटी थाना अंतर्गत बंतानगर जो स्लम बस्ती कहलाता है. यहां खुलेआम ई- सिगरेट बिकना कई सवालों को जन्म दे रहा है. इस मामले में पुलिस चाहे तो तस्करी के धाराओं के तहत FIR दर्ज कर गिरफ़्तारी कर सकती है. बताया जाता है कि 50% से अधिक निकोटिन युक्त ई- सिगरेट की कीमत करीब 4000 रुपए के आसपास हैं, जबकि रिफिल के लिए 2000 और फ्लेवर युक्त निकोटीन के लिए 1500 से लेकर 2000 तक वसूले जाते हैं. इसके खरीदार युवा वर्ग होते हैं. खासकर हाई सोसाइटी के स्कूली बच्चे इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि बंता नगर से निकालकर ई- सिगरेट की सप्लाई पूरे जमशेदपुर में हो रही थी. दुकानदार मुकेश प्रजापति शुरुआती दौर में गांजा तस्करी में संलिप्त था. धीरे-धीरे उसने गांजा तस्करी से अकूत दौलत कमाई. उसके फेसबुक प्रोफाइल को चेक करने पर कई पोस्ट विदेशी टूर के मिल जाएंगे जिससे संभावना जताई जा रही है कि मुकेश प्रजापति उर्फ राजा गैर कानूनी धंधे में संलिप्त है. पुलिस यदि गहराई से तहकीकात कर तो बड़ा खुलासा हो सकता है. वैसे अंदरखाने की माने तो पुलिस के मिली भगत से राजा ने नशे के कारोबार से अकूत संपत्ति अर्जित की है.

