चांडिल/ Afroz Mallik भूमि अधिकार आंदोलन (बीएए) और संबद्ध जन आंदोलनों के प्रतिनिधियों ने बुधवार को राष्ट्रपति के नाम स्मार पत्र सौंपते हुए भूमि, आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों के अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा की मांग की. यह पहल राष्ट्रीय एकता दिवस पर भूमि हड़प और कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ की गई. आंदोलनकारियों ने कहा कि विकास के नाम पर हो रहे भूमि अधिग्रहण, खनन, जल- जंगल-ज़मीन की लूट और विस्थापन ने लाखों किसानों, आदिवासियों, दलितों, मछुआरों और गरीब समुदायों को बेदखल कर दिया है.

उन्होंने वनाधिकार कानून (FRA), भूमि अधिग्रहण कानून (LARR) समेत सभी संबंधित कानूनों के सही क्रियान्वयन और कॉर्पोरेट कब्जे पर रोक की मांग की. स्मार पत्र में 70 से अधिक संगठनों की भागीदारी से बनी 11 सूत्रीय मांगें शामिल हैं, जिनमें भूमि अधिकार कानूनों का पूर्ण क्रियान्वयन, सीलिंग सरप्लस, चारागाह, दलित- आदिवासी भूमि की सुरक्षा, सहकारी खेती और न्यूनतम मजदूरी की गारंटी, संपत्ति कर और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों का विस्तार, जल- जंगल-भूमि और खनिज संपदाओं पर कॉर्पोरेट दोहन पर रोक, ग्राम सभाओं की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण पर प्रतिबंध, भूमि बैंक और कॉर्पोरेट भूमि भंडारण योजनाओं का अंत, बुलडोजर राजनीति और अन्यायपूर्ण विस्थापन का विरोध शामिल है. आंदोलन ने स्पष्ट किया कि भूमि और संसाधनों का सवाल केवल आजीविका का नहीं बल्कि लोकतंत्र, गरिमा और संवैधानिक न्याय से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि भूमि और प्राकृतिक संसाधन अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा, कॉर्पोरेट कब्जा रोकने और समुदायों के अधिकार बढ़ाने वाली नीतियां, लोकतांत्रिक, सामाजिक और पारिस्थितिक न्याय को बढ़ावा देंगी. ज्ञापन सौंपने वालों में अध्यक्ष नारायण गोप, सचिव श्यामल माडी, कार्तिक महतो, आदित्य देव, गोनो कवरत, डोमन बास्के, मधु मंडल समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे.

