चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में वर्षों से जर्जर सड़क की मरम्मत नहीं होने से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार खुद मोर्चा संभाल लिया. सोनुआ विद्युत सब स्टेशन से बनजीरा होते हुए निश्चिंतपुर तक करीब चार किलोमीटर लंबी ग्रामीण मुख्य सड़क की मरम्मत शुक्रवार से ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए शुरू कर दी.


यह सड़क गोलमुंडा और लोंजो पंचायत के दर्जनों गांवों के लोगों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है. बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी प्रतिदिन इसी सड़क से गुजरते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक पिछले तीन-चार वर्षों से सड़क की हालत लगातार खराब होती गई, लेकिन मरम्मत नहीं होने के कारण अब अधिकांश हिस्सों की पिच उखड़ चुकी है और जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं.
चंदा जुटाया, श्रमदान किया और सड़क सुधारने उतर गए ग्रामीण
लंबे इंतजार के बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से सड़क को चलने लायक बनाने का निर्णय लिया. इसके लिए ग्रामीणों ने अपनी क्षमता के अनुसार पैसे भी जुटाए और शुक्रवार से सामूहिक श्रमदान शुरू कर दिया. स्थानीय मुखिया संजीव कांडेयांग ने सड़क मरम्मत में इस्तेमाल हो रही JCB का खर्च उठाकर सहयोग किया.
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण सामान्य आवागमन के साथ स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है. किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है.
श्रमदान में जुटे ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से सड़क की बदहाल स्थिति के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से मरम्मत नहीं कराए जाने के कारण उन्हें मजबूर होकर खुद सड़क सुधारने के लिए उतरना पड़ा.
ग्रामीणों की यह पहल जहां सामुदायिक भागीदारी की मिसाल पेश कर रही है, वहीं चार किलोमीटर की महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क की वर्षों से मरम्मत नहीं होना संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग अब सड़क की स्थायी मरम्मत की दिशा में पहल करेगा, ताकि हर साल उन्हें अपने स्तर से गड्ढे भरने की नौबत न आए.
रिपोर्ट: जयंत प्रमाणिक

