चाईबासा: भाजपा पश्चिमी सिंहभूम जिला महामंत्री भूषण पाट पिंगुआ ने जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर झारखंड सरकार, शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, लेकिन सरकार केवल घोषणाओं और दावों तक सीमित है.

उन्होंने बताया कि जिले के 171 हाई स्कूलों में से 59 स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन हैं, जिससे करीब 3420 छात्र-छात्राएं प्रभावित हो रहे हैं. कई स्कूलों में विषय विशेषज्ञों की भारी कमी है. कहीं हिंदी शिक्षक गणित पढ़ा रहे हैं तो कहीं विज्ञान की पढ़ाई बिना विशेषज्ञ शिक्षकों के कराई जा रही है.
भूषण पाट पिंगुआ ने कहा कि प्लस टू विद्यालयों की स्थिति और भी खराब है. सरकार ने स्कूलों को इंटर स्तर तक अपग्रेड तो कर दिया, लेकिन अलग से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई. 9वीं और 10वीं के शिक्षक ही 11वीं-12वीं की कक्षाएं चला रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
उन्होंने सरकार की स्कूल मर्जर नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छोटे स्कूलों को बंद कर दूरस्थ विद्यालयों में जोड़ने की तैयारी की जा रही है. इससे गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और ड्रॉपआउट की संख्या बढ़ सकती है.
भाजपा नेता ने बीच सत्र में किताब और पाठ्यक्रम बदलने के फैसले को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है.
उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर सभी चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा सुधार के नाम पर केवल दिखावा कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद खराब है.
भूषण पाट पिंगुआ ने मांग की कि सरकार अविलंब शिक्षकों की नियुक्ति करे, स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए और स्थायी शिक्षा नीति लागू करे. अन्यथा आने वाले समय में छात्र-युवा आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
रिपोर्ट: जयंत प्रमाणिक



