जमशेदपुर: भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में यूरेनियम की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाली है. यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के. आनंद राव ने कहा कि देश में करीब 60 वर्षों से सुरक्षित तरीके से यूरेनियम का खनन किया जा रहा है. परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को देखते हुए यूरेनियम की उपलब्धता और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.


डॉ. राव ने कहा कि यूरेनियम और रेडिएशन को लेकर समाज के एक हिस्से में कई तरह की आशंकाएं और नकारात्मक धारणाएं हैं. इन्हें दूर करने के लिए UCIL लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. सुरक्षित खनन के साथ स्थानीय लोगों का विश्वास कायम रखना भी कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है.

2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
डॉ. राव के अनुसार देश में उत्पादित यूरेनियम भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखते हुए वर्ष 2047 तक देश में 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.
उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचने में घरेलू स्तर पर यूरेनियम की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इसी को ध्यान में रखते हुए UCIL उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
मौजूदा खदानों का विस्तार, नए राज्यों में भी तैयारी
यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने के लिए मौजूदा खदानों के विस्तार पर काम किया जा रहा है. इसके साथ राजस्थान और आंध्र प्रदेश में नई यूरेनियम खदानें शुरू करने की योजनाओं पर भी काम चल रहा है.

नए स्रोतों की तलाश के तहत एक और महत्वपूर्ण संभावना पर अध्ययन किया जा रहा है. डॉ. राव ने बताया कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के कॉपर टेलिंग्स से यूरेनियम निकालने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है. यदि यह प्रयास तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यवहारिक साबित होता है तो यूरेनियम प्राप्त करने के लिए एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध हो सकता है.
खनन के साथ सुरक्षा और पर्यावरण भी प्राथमिकता
डॉ. राव ने स्पष्ट किया कि उत्पादन बढ़ाना ही एकमात्र उद्देश्य नहीं है. यूरेनियम खनन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन, पर्यावरण संरक्षण और आसपास रहने वाले लोगों का विश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि यूरेनियम को लेकर लोगों के बीच मौजूद भ्रम को वैज्ञानिक तथ्यों और जागरूकता के माध्यम से दूर करने की जरूरत है. कंपनी इसी उद्देश्य से खनन क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रही है.
नेट जीरो लक्ष्य में भी परमाणु ऊर्जा की अहम भूमिका
डॉ. राव ने कहा कि यूरेनियम उत्पादन में वृद्धि से देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को मजबूती मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने में सहायता मिलेगी. इसके साथ वर्ष 2070 तक भारत के नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में भी परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के साथ पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान भी जरूरी है. ऐसे में घरेलू यूरेनियम उत्पादन, सुरक्षित खनन और परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.

