सरायकेला:नगर पंचायत सरायकेला में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. नगर के विकास के लिए करीब दो महीने पहले एक करोड़ रुपये का आवंटन मिलने के बावजूद अब तक इस राशि का उपयोग नहीं हो सका है. बताया जा रहा है कि विकास योजनाओं के चयन और प्राथमिकताओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. आपसी खींचतान के कारण विकास योजनाओं की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है.


सूत्रों के अनुसार, करीब दो महीने पहले नगर पंचायत सरायकेला को विभाग की ओर से विभिन्न विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गयी थी. इस राशि से नगर के विभिन्न वार्डों में सड़क, नाली, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जरूरी कार्य कराये जा सकते थे. हालांकि, अब तक राशि के उपयोग को लेकर ठोस पहल नहीं हो सकी है. ऐसे में विकास के लिए उपलब्ध राशि का लाभ नगरवासियों को नहीं मिल पा रहा है.
छह महीने में एक भी नई योजना नहीं
नगर पंचायत चुनाव संपन्न हुए करीब छह महीने बीत चुके हैं. चुनाव के दौरान नगर के विकास को लेकर कई तरह के वादे किये गये थे. सड़कों की स्थिति सुधारने, नालियों की समस्या दूर करने, साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर करने और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही गयी थी. लेकिन चुनाव के बाद अब तक किसी बड़ी नयी विकास योजना का धरातल पर उतरना चर्चा में नहीं आया है. इससे नगरवासियों में भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है.
जनप्रतिनिधियों की खींचतान का असर विकास पर
नगर पंचायत में जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी मतभेद और खींचतान की चर्चा अब विकास कार्यों से जोड़कर देखी जा रही है. जनता ने अपने-अपने वार्ड की समस्याओं के समाधान और नगर के विकास की उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना है. ऐसे में लोगों की प्राथमिकता विकास कार्यों का समय पर क्रियान्वयन है. यदि योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन को लेकर आपसी सहमति नहीं बनती है, तो इसका सीधा असर नगर की जनता पर पड़ता है.
नगर के कई वार्डों में सड़क, नाली, जलनिकासी, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अब भी मौजूद हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए योजनाओं की जरूरत है. इसके बावजूद विकास के लिए राशि उपलब्ध होने के बाद भी काम शुरू नहीं होने से लोगों में निराशा बढ़ रही है.
सरकारी राशि उपलब्ध, फिर भी योजनाओं पर निर्णय का इंतजार
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये का आवंटन हो चुका है, तो अब तक योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी. नगरवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को आपसी मतभेद से ऊपर उठकर नगर के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए. जनता को राजनीतिक और व्यक्तिगत विवादों से अधिक अपने वार्ड में जरूरी सुविधाओं की जरूरत है.
नगरवासियों की नजर अब इस बात पर है कि एक करोड़ रुपये की राशि किन योजनाओं पर खर्च की जाती है और विकास कार्यों की शुरुआत कब होती है. लोगों को बेहतर सड़क, जलनिकासी, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की दरकार है.
अब मामला सिर्फ एक करोड़ रुपये के आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से भी जुड़ गया है. नगरवासियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि विकास के लिए उपलब्ध राशि का समय पर उपयोग क्यों नहीं हो रहा है. आने वाले दिनों में जनप्रतिनिधि आपसी मतभेद दूर कर विकास योजनाओं पर सहमति बनाते हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. फिलहाल सरायकेला नगर पंचायत की जनता को आश्वासन से अधिक धरातल पर विकास कार्य शुरू होने का इंतजार है.
प्रमोद सिंह. संपादक

