सरायकेला: बच्चों को कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और समय की पाबंदी का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक आज खुद अपने वेतन के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं. सरायकेला-खरसावां जिले के माध्यमिक एवं प्लस टू शिक्षकों को लगातार तीन महीने से वेतन नहीं मिलने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के मौके पर भी वेतन भुगतान नहीं होने से शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वेतन भुगतान के लिए आवंटन उपलब्ध है, तो आखिर भुगतान में देरी क्यों हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है.


झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने शिक्षकों की इस समस्या पर गहरी नाराजगी जताते हुए विभागीय व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षकों से छोटी-सी गलती होने पर तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया जाता है. कई मामलों में वेतन रोकने से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई की जाती है, लेकिन जब शिक्षकों को लगातार तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता, तब जिम्मेदारी तय करने की बारी आने पर व्यवस्था मौन क्यों हो जाती है.
योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब जिले में वेतन भुगतान के लिए आवंटन उपलब्ध है, तो माध्यमिक एवं प्लस टू शिक्षकों का वेतन महीनों से लंबित रहने की वजह क्या है. जिले के कई विद्यालयों के वेतन विपत्र जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से तैयार किए जाते हैं. इसके बावजूद कभी तकनीकी समस्या, कभी नेटवर्क की परेशानी तो कभी अन्य कारणों का हवाला दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन उनका समय पर समाधान करना भी संबंधित विभाग और अधिकारियों की जिम्मेदारी है. यदि आवंटन उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा है, तो इसकी वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष ने शिक्षकों की आर्थिक परेशानियों को सामने रखते हुए कहा कि शिक्षक भी किसी परिवार का सदस्य है. उसके बच्चों की स्कूल फीस, घर का राशन, दवाइयों का खर्च और बैंक की किस्तें समय पर चुकानी होती हैं. बैंक की ईएमआई में देरी होने पर शिक्षक को ब्याज और दंड का सामना करना पड़ता है, लेकिन महीनों तक वेतन भुगतान लंबित रहने पर व्यवस्था से जवाब क्यों नहीं मांगा जाता.
उन्होंने कहा कि शिक्षक का वेतन कोई एहसान नहीं, बल्कि उसकी सेवा और परिश्रम का अधिकार है. शिक्षक दिन-रात विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में जुटा रहता है। ऐसे में उसी शिक्षक को अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों के लिए आर्थिक परेशानी झेलनी पड़े, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है.
योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों से अनुशासन और समयपालन की अपेक्षा की जाती है, जो उचित भी है. लेकिन यही नियम और जवाबदेही वेतन भुगतान की व्यवस्था पर भी लागू होनी चाहिए. यदि शिक्षक से किसी गलती पर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है, तो तीन महीने तक वेतन भुगतान में देरी होने पर संबंधित व्यवस्था से स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा जाना चाहिए.
उन्होंने सवाल किया कि यदि शिक्षक अपनी समस्या उठाता है या वेतन भुगतान में देरी के खिलाफ आवाज बुलंद करता है, तो क्या उसे भी कारण बताओ नोटिस का भय दिखाया जाएगा. शिक्षक की चुप्पी को उसकी मजबूरी समझा जा सकता है, उसकी सहमति नहीं.
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष ने जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि लंबित वेतन का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा देरी के कारणों की जांच कर जवाबदेही निर्धारित की जाए. शिक्षकों को अपने ही अर्जित वेतन के लिए बार-बार गुहार लगाने की स्थिति से मुक्ति मिलनी चाहिए.
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले को गंभीरता से उठाने की अपील की, ताकि शिक्षकों की आवाज सरकार और संबंधित विभाग तक पहुंचे.
योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षकों की मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि उनके अर्जित वेतन के समय पर भुगतान की है. उन्होंने कहा, “शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता है. जो शिक्षक बच्चों को ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है, उसे अपने ही वेतन के लिए महीनों इंतजार करना पड़े, यह व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है. जब आवंटन उपलब्ध है, तो भुगतान में देरी क्यों हो रही है. आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा. प्रशासन को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की आर्थिक विवशता को समझना और उनकी समस्याओं का समाधान करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए. अब सवाल यही है कि सरायकेला- खरसावां के माध्यमिक एवं प्लस टू शिक्षकों को उनका बकाया वेतन कब मिलेगा और तीन महीने की देरी के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी.
प्रमोद सिंह (संपादक)

