सरायकेला: सरायकेला की धरती पर मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था, राजपरिवार की गौरवशाली विरासत और सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी. सरायकेला पब्लिक दुर्गा पूजा कमेटी की पूजा का उद्घाटन सरायकेला के राजा प्रताप आदित्य सिंह देव एवं रानी अरुणिमा सिंह देव ने संयुक्त रूप से किया.लगभग 400 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक पूजा परंपरा ने एक बार फिर सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था की भव्य तस्वीर प्रस्तुत की. उद्घाटन के अवसर पर कमेटी के सभी सदस्य उपस्थित रहे और मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की.


राजा प्रताप आदित्य सिंह देव ने कहा सरायकेला की पहचान केवल उसके इतिहास और राजपरंपरा से नहीं, बल्कि यहां की जीवंत संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता से भी है. लगभग 400 वर्षों से चली आ रही मां दुर्गा की पूजा हमारी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है. यह परंपरा हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति एवं संस्कारों को सहेजने की प्रेरणा देती है. हमारी जिम्मेदारी है कि इस ऐतिहासिक परंपरा को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ आगे बढ़ाएं.
रानी अरुणिमा सिंह देव ने कहा मां दुर्गा की आराधना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शक्ति, साहस, नारी सम्मान और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है. सरायकेला में सदियों से चली आ रही यह परंपरा लोगों की अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक है। हमारी कामना है कि मां दुर्गा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लाएं तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारा मजबूत हो.
सरायकेला पब्लिक दुर्गा पूजा कमेटी की यह पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी परंपरा है. लगभग चार सौ वर्षों से चली आ रही इस पूजा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और विश्वास की परंपरा आगे बढ़ती रही है. समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन मां दुर्गा के प्रति भक्तों की आस्था आज भी कायम है.
उद्घाटन समारोह के दौरान कमेटी के सभी सदस्य मौजूद रहे। मां दुर्गा की आराधना के साथ पूजा आयोजन की शुरुआत हुई. इस ऐतिहासिक परंपरा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि विरासत केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज नाम नहीं, बल्कि वह आस्था है, जिसे पीढ़ियां अपने संस्कारों में जीवित रखती है.
सरायकेला की यह चार सौ साल पुरानी पूजा परंपरा आज भी धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता की मिसाल बनी हुई है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

