गम्हरिया. दुर्गा पूजा को लेकर एक तरफ जिला प्रशासन सुरक्षित यातायात और भीड़ नियंत्रण के लिए लगातार बैठकें कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ गम्हरिया की मुख्य सड़क पर हाईवा और कार की टक्कर ने नो एंट्री की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.


शुक्रवार को शालिग्राम स्वीट्स के समीप हाईवा संख्या JH 02AE 1265 और कार संख्या JH 05CW 0657 के बीच जोरदार टक्कर हो गई. हादसे में कार का दाहिना हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

आदेश जारी करना ही काफी या पालन कराना भी जिम्मेदारी ?
दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए उपायुक्त की ओर से भारी मालवाहक वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने के लिए नो एंट्री का आदेश जारी किया गया है. ऐसे में यह घटना केवल सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि आदेश के क्रियान्वयन का सवाल भी खड़ा करती है.
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हादसे के वक्त हाईवा निर्धारित नो एंट्री के समय और क्षेत्र में था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. यदि जांच में वाहन प्रतिबंधित अवधि में चलता पाया जाता है तो सवाल सिर्फ चालक पर नहीं, बल्कि उन चेकिंग प्वाइंट और निगरानी व्यवस्था पर भी उठेगा, जिन्हें आदेश का पालन सुनिश्चित करना था.
त्योहार में चूक की गुंजाइश नहीं
पूजा के दौरान गम्हरिया की सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में पैदल लोगों और वाहनों का दबाव बढ़ जाता है. ऐसे समय में भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है.
इस हादसे में जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घटना ने प्रशासन के सामने एक स्पष्ट सवाल जरूर रख दिया है नो एंट्री का आदेश सिर्फ कागज पर है या सड़क पर भी उसका पालन कराया जा रहा है ?
अब जरूरत संबंधित हाईवा के परिचालन समय की जांच करने और यह स्पष्ट करने की है कि वह नियमों के तहत सड़क पर था या नो एंट्री का उल्लंघन कर रहा था. यदि उल्लंघन सामने आता है तो कार्रवाई के साथ निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

