सरायकेला: श्रम अधीक्षक की मनमानी से औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी सहमे हुए हैं. कई उद्यमियों ने इसकी शिकायत विभगीय मंत्री और मुख्यमंत्री से की है. बताया जा रहा है कि एक स्थानीय जनप्रतिनिधि के साथ मिलकर श्रम अधीक्षक बगैर किसी पूर्व सूचना अथवा शिकायत के उद्यमियों का भयादोहन कर रहे हैं.

ऐसा ही एक मामला प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह आरकेएफएल का सामने आया है. जहां बगैर किसी पूर्व के नोटिस अथवा वैद्य शिकायत के श्रम अधीक्षक अविनाश ठाकुर द्वारा प्रबंधन पर मजदूरों के वेतन कटौती का आरोप लगाते हुए प्रबंधन पर श्रम कानूनों का उल्लंघन करने की बात कही गई है. हालांकि इसको लेकर उनके द्वारा प्रबंधन को किसी प्रकार का लिखित नोटिस जारी नहीं किया गया है. मजे की बात तो ये है कि श्रम अधीक्षक ने चुनिंदा मीडियाकर्मियों से खबर भी बनवा दिया. इसपर जब उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मौखिक रूप से प्रबंधन के कुछ लोगों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही. उनसे जब पूछा गया कि आपपर किसी खास जनप्रतिनिधि के प्रभाव में आकर कंपनी का भयादोहन करने की शिकायत मिल रही है इसपर उन्होंने कुछ भी स्पष्ट रूप से जवाब नही दिया. इतना ही नहीं जब उनसे किसी खास मीडिया में छपे रिपोर्ट और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को सूचित करने के विषय में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने फोन काट दिया.
इस संबंध में आरकेएफएल के अधिकारी ने बताया कि एक स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा हर कार्यक्रम के लिए पैसे मांगे जाते हैं. हाल ही में उनके द्वारा डेढ़ लाख रुपए की मांग की गई जिसे नहीं देने पर उनके द्वारा साजिश के तहत श्रम अधीक्षक को सामने करके भयादोहन किया जा रहा है. इसकी शिकायत हमने विभगीय मंत्री और मुख्यमंत्री से किया है. उन्होंने बताया कि श्रम अधीक्षक द्वारा प्रबंधन को किसी प्रकार का कोई नोटिस नहीं दिया गया है. मजदूरों के वेतन कटौती का मामला हमारा अंदरूनी मामला है. प्रबंधन और यूनियन इसे देख रहा है. यदि उनके पास किसी मजदूर ने शिकायत किया है तो उन्हें लिखित देना चाहिए था. उन्होंने डीसी को भी इस मामले पर शिकायत करने की बात कही है.
बता दें कि श्रम अधीक्षक के आतंक से इंडस्ट्रियल एरिया के दर्जनों उद्यमी परेशान हो चुके हैं. सबसे खास बात ये है कि वे तीन- तीन जिला के प्रभार में हैं और कभी भी नियमित रूप से अपने किसी कार्यालय में नहीं होते हैं. हर ठेकेदार उनके आतंक से आतंकित है. इसके लिए उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी साथ मिला लिया है. दोनों की जुगलबंदी से उद्यमियों और ठेकेदार सहमे हुए हैं. श्रम अधीक्षक इतने शातिर हैं कि किसी भी कंपनी अथवा संस्थान में कार्रवाई करने की सूचना न तो जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के जरिए मीडिया में सार्वजनिक करते हैं ना ही स्थानीय मीडिया कर्मियों को इसकी जानकारी देते हैं. चुपचाप खास और चुनिंदा मीडिया कर्मियों को सूचित कर खबर छपवा देते हैं और उद्यमियों का भयादोहन करते हैं. जबकि तमाम विभागों की सूचना जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से मीडिया कर्मियों को उपलब्ध हो जाती है.

