सरायकेला: भगवान श्री जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा महोत्सव की धार्मिक परंपराओं की शुरुआत देव स्नान पूर्णिमा के साथ हो गई है. सोमवार को श्री जगन्नाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का पवित्र स्नान कराया गया. स्नान के बाद महाप्रभु को परंपरा के अनुसार खट्टा भोग अर्पित किया गया.


धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और अगले 15 दिनों तक अनसर गृह में विश्राम करते हैं. इस अवधि को अनसर या अनवासर कहा जाता है. इस दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद रहेंगे और केवल अधिकृत पुजारी एवं सेवायत ही महाप्रभु की विशेष सेवा-पूजा और आयुर्वेदिक उपचार करेंगे.
श्री जगन्नाथ सेवा समिति के महासचिव शंकर सतपति ने बताया कि 14 जुलाई को नेत्रोत्सव यानी नवयौवन दर्शन का आयोजन होगा. इस दिन महाप्रभु पूर्ण स्वस्थ स्वरूप में पहली बार भक्तों को दर्शन देंगे. इसके बाद 16 जुलाई को सरायकेला की ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु रथ खींचकर पुण्य अर्जित करेंगे.
उन्होंने बताया कि सरायकेला में देव स्नान पूर्णिमा से लेकर अनसर, नेत्रोत्सव, रथयात्रा, मौसीबाड़ी प्रवास और बहुड़ा यात्रा तक सभी धार्मिक परंपराएं पुरी की तर्ज पर शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न की जाती हैं. देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है और पूरा शहर अब ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव की तैयारियों में जुट गया है.
प्रमोद सिंह
संपादक

