सरायकेला: सरायकेला छऊ नृत्य के कलाकार कुना शामल को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी के ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार-2024’ से सम्मानित किया जाना पूरे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण है. इस राष्ट्रीय उपलब्धि ने सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. लेकिन एक ओर जहां सरायकेला छऊ के कलाकार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर इस पारंपरिक नृत्य कला की नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने वाला राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है. ऐसे में केंद्र के संचालन और सांस्कृतिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं.



सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष सह सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार चौधरी ने कुना शामल की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को दोबारा सुचारु रूप से संचालित करने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि सरायकेला छऊ की पहचान केवल पुरस्कारों और सम्मानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस कला के संरक्षण, संवर्धन और नई प्रतिभाओं को तैयार करने के लिए ठोस कदम उठाने की भी आवश्यकता है.
राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा सरायकेला का गौरव
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के हाथों कुना शामल को प्रतिष्ठित सम्मान मिलना सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विश्वविख्यात छऊ नृत्य परंपरा के लिए गर्व की बात है. यह उपलब्धि केवल एक कलाकार की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उन गुरुओं, कलाकारों और साधकों के दशकों के समर्पण की पहचान है, जिन्होंने अपनी मेहनत और साधना से सरायकेला छऊ की परंपरा को जीवित रखा है.
उन्होंने कहा कि कुना शामल की सफलता क्षेत्र के युवा कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी. इससे यह साबित होता है कि सरायकेला की मिट्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. जरूरत केवल उन्हें उचित प्रशिक्षण, अवसर और प्रोत्साहन देने की है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें.
सम्मान मिला, अब बंद छऊ केंद्र को खोलने की बारी
मनोज चौधरी ने कहा कि सरायकेला छऊ की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए कलाकारों को नियमित प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं, उचित मंच और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. वर्ष 1961 से सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने वाला राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र प्रशिक्षण और नई प्रतिभाओं को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है.
उन्होंने चिंता जताई कि लंबे समय से केंद्र का बंद रहना कलाकारों के प्रशिक्षण, नई प्रतिभाओं के निर्माण और छऊ नृत्य के प्रचार-प्रसार के लिहाज से उचित स्थिति नहीं है. इससे पारंपरिक नृत्य शैली को सीखने के इच्छुक युवाओं के सामने भी कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं. उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में गंभीरता से पहल करने और केंद्र को व्यवस्थित रूप से दोबारा संचालित करने की मांग की.
राज्य सरकार और विधायक की पहल के बीच प्रशासन से ठोस कदम की अपेक्षा
चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार और स्थानीय विधायक दशरथ गागराई के प्रयासों से राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को व्यवस्थित एवं सुदृढ़ बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल की जा रही है. अब जरूरत है कि जिला प्रशासन भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाए और संस्थान को दोबारा जीवंत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करे.
उन्होंने कहा कि केंद्र के संचालन की रूपरेखा पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए. इसमें कलाकारों के हित, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सरायकेला छऊ की मूल परंपरा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. राज्य सरकार, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और कलाकार समुदाय के बीच बेहतर समन्वय से ही इस दिशा में स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.
सरायकेला में छऊ प्रशिक्षण और शोध की व्यवस्था विकसित करने की मांग
मनोज चौधरी ने कहा कि पूर्व में संगीत नाटक अकादमी की ओर से सरायकेला छऊ को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरायकेला में केंद्र स्थापित करने की पहल की गई थी, लेकिन अंततः केंद्र चंदनकियारी में स्थापित हुआ. सरायकेला के कलाकारों की अपेक्षा है कि क्षेत्र की सांस्कृतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां भी छऊ नृत्य के प्रशिक्षण, शोध और संवर्धन के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए.
उन्होंने कहा कि सरायकेला छऊ की विशिष्ट नृत्य शैली, भाव-भंगिमाएं, मुखौटे और पारंपरिक कलात्मक विशेषताएं इसे दूसरी नृत्य शैलियों से अलग पहचान देती हैं. इस अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने के लिए कलाकारों की साधना के साथ-साथ संस्थागत सहयोग और सरकारी स्तर पर निरंतर प्रोत्साहन भी आवश्यक है.
युवा कलाकारों को मिले प्रशिक्षण, सम्मान और रोजगार के अवसर
चौधरी ने कहा कि सरायकेला छऊ केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत है. इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना समाज, सरकार और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है. युवा कलाकारों को प्रशिक्षण, सम्मान, आर्थिक प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हों.
उन्होंने कहा कि यदि राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को नियमित रूप से संचालित किया जाता है, तो इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला निखारने का अवसर मिलेगा और सरायकेला छऊ की परंपरा को नई ऊर्जा मिल सकती है.
कुना शामल को दी बधाई, छऊ की प्रतिष्ठा और बढ़ने का जताया विश्वास
मनोज कुमार चौधरी ने कुना शामल को संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित युवा पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने विश्वास जताया कि कुना शामल की कला-साधना नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और सरायकेला छऊ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा मिलेगी.
उन्होंने कहा कि कुना शामल की उपलब्धि ने सरायकेला का मान बढ़ाया है, लेकिन अब समय है कि इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने वाली सांस्कृतिक व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए.
*अब सवाल केवल एक कलाकार को मिले राष्ट्रीय सम्मान का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का भी है, जो सरायकेला की अनमोल सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचा सके. कुना शामल की उपलब्धि ने सरायकेला को गौरवान्वित किया है. अब लोगों की निगाहें राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को फिर से सक्रिय करने की दिशा में होने वाली ठोस पहल पर टिकी हैं.*
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह (संपादक)

