सरायकेला: सरायकेला की समृद्ध छऊ परंपरा और उसके सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव पर किए गए शोध को अकादमिक स्तर पर महत्वपूर्ण मान्यता मिली है. अमलेश कुमार सिन्हा को मंगलवार को कोल्हान विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के कर-कमलों से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई.


अमलेश कुमार सिन्हा का शोध विषय “छऊ नृत्य का सरायकेला राज क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन पर प्रभाव (1947-2015) रहा. अपने शोध के माध्यम से उन्होंने सरायकेला की पहचान और यहां के सामाजिक जीवन में छऊ नृत्य की भूमिका के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया है.
शोध में वर्ष 1947 से 2015 तक की अवधि को केंद्र में रखते हुए यह समझने का प्रयास किया गया कि छऊ नृत्य ने सरायकेला राज क्षेत्र के सामाजिक जीवन, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक परंपराओं को किस प्रकार प्रभावित किया. छऊ केवल मंचीय कला नहीं, बल्कि सरायकेला की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है इसी व्यापक संदर्भ को शोध का आधार बनाया गया.
अमलेश कुमार सिन्हा की इस उपलब्धि को सरायकेला की छऊ परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसे समय में जब सरायकेला छऊ की ऐतिहासिक विरासत, संगीत और नृत्य परंपरा के संरक्षण तथा उसके दस्तावेजीकरण पर जोर दिया जा रहा है, छऊ के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव पर किया गया यह शोध इस विरासत को अकादमिक दृष्टि से समझने में महत्वपूर्ण योगदान माना जा सकता है.
पीएचडी की उपाधि प्राप्त करना अमलेश कुमार सिन्हा के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ सरायकेला की ऐतिहासिक छऊ परंपरा के लिए भी गौरव का विषय है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

