जमशेदपुर: सुंदरनगर स्थित पुड़ीहासा सैनिक कॉलोनी में स्वर्णरेखा नहर प्रमंडल, चांडिल की खरकई दायीं मुख्य नहर यूजीपीएल योजना के तहत हो रहे बाउंड्रीवाल निर्माण का विवाद अब उपायुक्त कार्यालय पहुंच गया है. ग्रामीणों ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को आवेदन सौंपकर विभागीय पदाधिकारियों, अभियंताओं एवं संवेदक से जुड़े लोगों पर रास्ता छोड़ने के एवज में कथित रूप से पैसे मांगने और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगाया है. ग्रामीणों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.


‘पैसे देने वालों को रास्ता, गरीब परिवारों की आवाजाही बंद’
ग्रामीणों का आरोप है कि बाउंड्रीवाल निर्माण के दौरान घरों तक आवागमन के लिए रास्ता छोड़ने का अनुरोध करने पर कथित रूप से पैसे मांगे गए. आवेदन में दावा किया गया है कि जिन लोगों ने पैसे दिए, उनके लिए रास्ता छोड़ा गया, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर कई परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं की गई.
ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता नहीं रहने से आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल वाहन का पहुंचना मुश्किल होगा, वहीं बच्चों को स्कूल आने-जाने में भी परेशानी होगी. विरोध करने पर विभागीय मामला दर्ज कराने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है.
ग्रामसभा और निर्माण प्रक्रिया पर भी सवाल
ग्रामीणों ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि निर्माण शुरू करने से पहले ग्रामसभा में योजना और उससे प्रभावित होने वाले रास्तों पर चर्चा क्यों नहीं की गई. उन्होंने डीसी से यह भी जांच कराने की मांग की कि योजना के क्रियान्वयन में लागू नियमों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं. आवेदन के मुताबिक ग्रामीणों ने एक अक्टूबर को कार्यपालक अभियंता को भी लिखित शिकायत देकर रास्ता छोड़ने की मांग की थी, लेकिन समाधान नहीं हुआ.
विधायक के पास पहुंचा था मामला, अब डीसी से जांच की गुहार
ग्रामीणों के अनुसार 13 अक्टूबर को उन्होंने पोटका विधायक संजीव सरदार को मामले से अवगत कराया था. इसके बाद विधायक ने विभागीय अधिकारियों और ग्रामीणों को बुलाकर आमने-सामने बातचीत कराई थी. अब ग्रामीणों ने उपायुक्त से कथित धन मांगने, वसूली और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के साथ प्रभावित परिवारों के लिए उचित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही जांच पूरी होने तक किसी प्रकार के कथित दबाव, धमकी या प्रताड़ना से सुरक्षा देने की भी गुहार लगाई है. फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित अभियंताओं और संवेदक पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी.

