सरायकेला: झारखंड की माटी की खुशबू और खरसावां छऊ की समृद्ध परंपरा आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर तक पहुंची. 12 से 21 अक्टूबर तक आयोजित नवरात्रि ब्रह्मोत्सव में खरसावां के छऊ कलाकारों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से झारखंड की लोक संस्कृति की सशक्त छाप छोड़ी.



त्रिनेत्र सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स के सौरव दुबे एवं बसंत कुमार के नेतृत्व में छऊ नृत्य कला केंद्र, खरसावां के कलाकारों ने श्रीकृष्ण की लीला पर आधारित ‘माया बंधन’ और झारखंड की पारंपरिक संस्कृति को प्रदर्शित करते ‘शिकार नृत्य’ की प्रस्तुति दी. पारंपरिक वेशभूषा, शारीरिक कौशल और भाव-भंगिमाओं के जरिए कलाकारों ने खरसावां छऊ की विशिष्ट शैली को मंच पर जीवंत किया.
आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के 169 कला दलों के करीब 3,700 कलाकारों ने हिस्सा लिया. विभिन्न राज्यों की लोक एवं पारंपरिक कलाओं के इस बड़े समागम में खरसावां छऊ की भागीदारी झारखंड के लिए विशेष आकर्षण रही.
मंदिर प्रबंधन की ओर से जारी सूचना के मुताबिक कार्यक्रम का आनंद करीब 6.46 लाख लोगों ने लिया, जबकि पूरे उत्सव के विभिन्न आयोजनों में दर्शकों की संख्या करीब 10 लाख रहने का अनुमान बताया गया है.
राष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक मंच पर खरसावां छऊ की प्रस्तुति ने झारखंड की पीढ़ियों पुरानी लोककला को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर दिया. कलाकारों की यह उपलब्धि खरसावां की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

