रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने में देरी और इसके लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. अदालत ने जुर्माने की राशि झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (JHALSA) में जमा करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है.


ED अधिकारियों ने FIR को दी है चुनौती
मामला ED के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल से संबंधित है. हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक इन अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए Cr.M.P. No. 286/2024 दाखिल की थी. इस मामले में राज्य सरकार और हेमंत सोरेन विपक्षी पक्ष हैं.
यह प्राथमिकी जनवरी 2024 में जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई के दौरान हेमंत सोरेन की शिकायत पर दर्ज हुई थी. शिकायत में ED अधिकारियों पर कथित उत्पीड़न और आदिवासी पहचान के आधार पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए थे. ED अधिकारियों ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए FIR रद्द करने की मांग की है.
ED अधिकारियों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक जारी
इस मामले में हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में ED अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की पीड़क कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया था. मई 2026 के एक आदेश में भी अदालत ने इस अंतरिम राहत को अगली सुनवाई तक जारी रखा था.
गुरुवार की सुनवाई में हेमंत सोरेन पक्ष की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया. अदालत ने देरी पर नाराजगी जताते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. अधिवक्ता धीरज कुमार ने भी सुनवाई के बाद इसकी जानकारी दी.
यह आदेश FIR में लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर फैसला नहीं है. 10 हजार रुपये का जुर्माना जवाब दाखिल करने में हुई देरी से संबंधित प्रक्रियागत आदेश है. FIR को रद्द करने की मांग वाली मूल याचिका पर सुनवाई अभी जारी है.

