जामताड़ा: जिले के उदलवानी पंचायत अंतर्गत आसनचुआं गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय आज भी सरकारी उपेक्षा की मार झेल रहा है. यहां सौ से अधिक बच्चे हर दिन जर्जर भवन में अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

विद्यालय भवन वर्ष 1952 में बना था, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है. दीवारें झुक चुकी हैं और उन्हें अस्थायी सहारे से टिकाया गया है. खपरैल की छत टूट चुकी है, जबकि सीमेंटेड हिस्से का प्लास्टर लगातार गिर रहा है. कई बार प्लास्टर गिरने से बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं.


विद्यालय का खंडहर भवन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरि प्रसाद राम ने बताया कि भवन की स्थिति बेहद खतरनाक है. उन्होंने कई बार विभाग को लिखित सूचना दी है. जमीन की नापी भी कराई गई और वर्ष 2024 में ग्रामसभा के माध्यम से नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

हरि प्रसाद राम (प्रधानाध्यापक)
शिक्षिका निखत तबस्सुम के अनुसार बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं. पानी कक्षाओं में भर जाता है और बच्चों को डर के बीच पढ़ाई करनी पड़ती है.

निखत तबस्सुम
छात्रों का कहना है कि स्कूल आने पर पढ़ाई से ज्यादा अपनी सुरक्षा की चिंता रहती है. उन्हें हर समय डर लगा रहता है कि कहीं छत या दीवार गिर न जाए.

जान जोखिम में डालकर पढ़ते बच्चे
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल गौचर जमीन पर होने के कारण नए भवन निर्माण में तकनीकी अड़चन आ रही है. हालांकि वे दूसरी जमीन देने को तैयार हैं और नापी भी हो चुकी है, लेकिन फाइलें अब भी दफ्तरों में अटकी हुई हैं.
जिला शिक्षा अधीक्षक विकेश कुणाल प्रजापति ने बताया कि नए भवन के लिए झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल को कई बार पत्र भेजा गया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अनटाइड फंड से जल्द दो कमरों का निर्माण कराया जाएगा. इसके बावजूद बड़ा सवाल बरकरार है- क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ? यदि भवन कभी गिर गया, तो मासूम बच्चों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा ?
Report By Manish Baranwal

