जामताड़ा: शारदीय नवरात्र के अवसर पर डीएन हाई स्कूल, जामताड़ा में भक्ति, संस्कृति और जीवन मूल्यों का अनूठा संगम देखने को मिला. विद्यालय के छात्र- छात्राओं ने मां दुर्गा से संबंधित आकर्षक झांकियां प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया. बच्चियों ने मां दुर्गा के स्वागत में गीत प्रस्तुत किए, वहीं बच्चों ने मां के दस हाथों में धारण किए गए अस्त्र- शस्त्रों के प्रतीकात्मक महत्व को समझाते हुए जीवन में उनके संदेशों को अपनाने की सीख दी.


अस्त्र-शस्त्रों में छिपे हैं जीवन को दिशा देने वाले संदेश
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि मां दुर्गा के हाथों में मौजूद प्रत्येक अस्त्र-शस्त्र जीवन के लिए एक विशेष संदेश देता है. त्रिशूल लोभ, मोह और अहंकार जैसी बुराइयों को त्यागने की प्रेरणा देता है. चक्र समय की निरंतर गति और ज्ञान के साथ आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है. वहीं, गदा अन्याय के विरुद्ध मजबूती से खड़े होकर न्याय का साथ देने की सीख देती है.
धनुष- बाण के माध्यम से बच्चों को एकाग्रता का महत्व समझाया गया. बताया गया कि जिस प्रकार लक्ष्य भेदने के लिए निशाना साधना जरूरी है, उसी तरह जीवन में अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए पढ़ाई और प्रयास में एकाग्रता बनाए रखना आवश्यक है. इसी तरह मां दुर्गा के अन्य अस्त्र-शस्त्रों के माध्यम से भी बच्चों को साहस, अनुशासन, आत्मविश्वास और बुराइयों के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा दी गई.
त्योहार धर्म से आगे सामाजिक एकता का संदेश देता है : प्रदीप कुमार भैया
विद्यालय के निदेशक प्रदीप कुमार भैया ने बच्चों को संबोधित करते हुए उन्हें और उनके माता-पिता को दुर्गापूजा की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि त्योहार हमें धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर सामाजिक संबंधों और आपसी भाईचारे से जुड़ने का अवसर देते हैं. दुर्गापूजा के मेले में सभी वर्गों, वर्णों, धर्मों और संप्रदायों के लोग एक साथ शामिल होकर उत्सव का आनंद लेते हैं. यही हमारी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा की खूबसूरती है.
बच्चों को सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
दुर्गापूजा के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर निदेशक ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि आजकल पूजा पंडालों और बाजारों में बिजली के उपकरणों से आकर्षक सजावट की जाती है. ऐसे में बच्चों को खुले तारों और बिजली के उपकरणों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. उन्होंने खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खाने से बचने और मेले में हमेशा माता-पिता या अभिभावक के साथ रहने की हिदायत दी. कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों और उपस्थित अभिभावकों को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया गया. इसके बाद बच्चों को छुट्टी देकर घर जाने के लिए विदा किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनीता मरांडी, मामूनी डे, रुम्पा डे सहित विद्यालय के अन्य शिक्षकों एवं कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
रिपोर्ट: मनीष बरनवाल

