जामताड़ा/ Manish Baranwal नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होता नजर आ रहा है. खासकर भारतीय जनता पार्टी के अंदर उभरी अंदरूनी खींचतान ने चुनावी समीकरण को और पेचीदा बना दिया है.

एक ओर जहां पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल की बहन रीना कुमारी को भाजपा समर्थित उम्मीदवार बताया जा रहा है. पिछले चुनाव में भी रीना कुमारी ने अपने भाई और भाजपा नेता वीरेंद्र मंडल के सहयोग तथा जनता के समर्थन से जीत दर्ज की थी. उनके नामांकन के दौरान झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री, नगर अध्यक्ष, जिला मीडिया प्रभारी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा प्रदेश मंत्री, पूर्व उपाध्यक्ष और महिला जिलाध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
वहीं दूसरी ओर भाजपा से जुड़े दो अन्य नेताओं ने भी बगावती तेवर अपनाते हुए अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है. तरुण गुप्ता ने महिला सीट आरक्षित होने के कारण अपनी पत्नी आशा गुप्ता को मैदान में उतारा है. वहीं बबीता झा ने भी अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश की है. इन नेताओं का कहना है कि यह चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहा है. उनका तर्क है कि यदि कमल फूल चुनाव चिन्ह मिलता है तो वे समर्थन करेंगे, लेकिन अलग प्रतीक पर चुनाव होने की स्थिति में वे मैदान में रहेंगे.
सूत्रों की मानें तो भाजपा के भीतर कई नेता अलग- अलग उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय हैं. भले ही वे खुलकर सामने न आ रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे चुनावी रणनीति में जुटे हुए हैं. ऐसे में भाजपा समर्थित उम्मीदवार पर बगावती तेवर कितना असर डालते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा.
इधर झामुमो समर्थित पूर्व विधायक स्वर्गीय विष्णु प्रसाद भैया की पत्नी सह समाजसेवी चमेली देवी भी अध्यक्ष पद के लिए मैदान में हैं. वे नगर पंचायत में बदलाव, स्वच्छ और सुंदर शहर तथा मजबूत नेतृत्व का मुद्दा उठा रही हैं.
कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्ष सह अधिवक्ता मुक्ता मंडल भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं. उनके नामांकन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने उन्हें एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में स्थापित किया है.
सभी उम्मीदवार शहर में व्याप्त गंदगी, विकास कार्यों की सुस्ती, स्वच्छता, भयमुक्त माहौल और पारदर्शी प्रशासन का वादा कर रहे हैं. अब सबकी नजर 23 फरवरी को होने वाले मतदान पर टिकी है. जनता किसे भरोसेमंद मानकर नगर पंचायत अध्यक्ष का ताज सौंपेगी और किसे नकारेगी, इसका फैसला मतपेटी करेगी.

