जामताड़ा: दुर्गापूजा के दौरान जिले के पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. आकर्षक पंडाल, रंग-बिरंगी रोशनी और विद्युत सज्जा के बीच अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था भी बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन जामताड़ा जिले में अग्निशमन विभाग के सीमित संसाधन और कर्मचारियों की कमी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. जिले के छह प्रखंडों के 1161 गांवों और दो शहरी निकायों में इस वर्ष 100 से अधिक स्थानों पर दुर्गापूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं. इनमें जामताड़ा शहर के छह और मिहिजाम के सात प्रमुख पूजा पंडाल शामिल हैं. इतनी बड़ी संख्या में पूजा स्थलों के बीच आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले में महज पांच दमकल वाहन उपलब्ध हैं. इनमें तीन बड़े और दो छोटे वाहन शामिल हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि यदि एक साथ दो या तीन स्थानों पर आग लग जाए, तो अग्निशमन विभाग किस तरह स्थिति पर काबू पाएगा.


पांच दमकल वाहनों के भरोसे पूरे जिले की सुरक्षा
जामताड़ा जिले में अग्निशमन विभाग का एकमात्र केंद्र जिला मुख्यालय स्थित कंबाइंड बिल्डिंग रोड पर है. यहीं से पूरे जिले में आग लगने की घटनाओं पर कार्रवाई की जाती है. जिला मुख्यालय से बागडेहरी की दूरी करीब 59 किलोमीटर, कुंडहित की 52 किलोमीटर और नाला प्रखंड की दूरी लगभग 43 किलोमीटर है. ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में आग लगने पर दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग सकता है. आग लगने की घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. समय पर दमकल वाहन नहीं पहुंचने की स्थिति में आग तेजी से फैल सकती है और जान-माल का नुकसान बढ़ने की आशंका रहती है. सड़क की स्थिति, यातायात और घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता भी राहत कार्य को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में दुर्गापूजा के दौरान दूरस्थ प्रखंडों में अतिरिक्त दमकल वाहनों या अस्थायी अग्निशमन व्यवस्था की जरूरत पर विचार करना आवश्यक है.
वाहनों से ज्यादा कर्मचारियों की कमी बनी चुनौती
जिला अग्निशमन पदाधिकारी सुधीर सिंह के अनुसार, विभाग के पास दमकल वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन कर्मचारियों की भारी कमी है. उन्होंने बताया कि एक बड़े दमकल वाहन के संचालन के लिए छह लोगों की आवश्यकता होती है, जबकि पूरे अग्निशमन विभाग में केवल छह कर्मचारी कार्यरत हैं. इस स्थिति में एक बड़े दमकल वाहन के संचालन के लिए ही सभी कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में अन्य वाहनों के संचालन, एक साथ कई स्थानों पर आग लगने की स्थिति और लगातार ड्यूटी की व्यवस्था किस तरह की जाएगी, यह महत्वपूर्ण सवाल है. दुर्गापूजा जैसे बड़े आयोजन के दौरान पर्याप्त मानवबल की उपलब्धता और आपात स्थिति में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
प्रशासन ने पूजा समितियों को दिए अग्नि सुरक्षा के निर्देश
जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक में उपायुक्त ने पूजा समितियों को अग्नि सुरक्षा के इंतजाम दुरुस्त रखने का निर्देश दिया है. प्रत्येक पूजा पंडाल में पर्याप्त मात्रा में बालू, पानी से भरी बाल्टियां और चालू हालत में अग्निशमन यंत्र रखने को कहा गया है. विद्युत सजावट में गुणवत्तापूर्ण तारों का इस्तेमाल करने, ओवरलोडिंग से बचने और अनुभवी इलेक्ट्रीशियन से ही बिजली संबंधी काम कराने पर जोर दिया गया है. भीड़ वाले दिनों में पूजा समितियों के स्वयंसेवकों को सतर्क रहने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया है. हालांकि, इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और प्रभावी निगरानी जरूरी है. प्रत्येक पंडाल में अग्निशमन यंत्रों की स्थिति, विद्युत वायरिंग और आपातकालीन निकास की व्यवस्था की जांच भी महत्वपूर्ण है. साथ ही, पूजा समितियों के स्वयंसेवकों को आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और शुरुआती बचाव कार्य की जानकारी होनी चाहिए.
गुरुवार से पूजा पंडालों का निरीक्षण करेंगे अग्निशमन पदाधिकारी
जिला अग्निशमन पदाधिकारी सुधीर सिंह ने बताया कि गुरुवार से जामताड़ा शहर और आसपास के पूजा पंडालों का भौतिक निरीक्षण शुरू किया जाएगा. इस दौरान अग्नि सुरक्षा से जुड़ी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे. उन्होंने बताया कि दुर्गापूजा के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम 24 घंटे मुस्तैद रहेगी. हालांकि, निरीक्षण का दायरा कितना व्यापक होगा, दूरस्थ प्रखंडों के पूजा पंडालों की जांच किस तरह की जाएगी और कमियां मिलने पर उन्हें दूर करने के लिए कितनी समयसीमा तय होगी, यह भी महत्वपूर्ण है. जिले के सभी प्रमुख पूजा स्थलों तक सुरक्षा व्यवस्था की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी.
सुरक्षा निर्देशों के साथ संसाधनों की समीक्षा भी जरूरी
दुर्गापूजा आस्था, शांति और उत्सव का पर्व है. इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन, अग्निशमन विभाग और पूजा समितियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है. पंडालों में अग्नि सुरक्षा के निर्देश जारी करना जरूरी है, लेकिन उनके जमीनी स्तर पर पालन और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. जिले में पांच दमकल वाहन और छह कर्मचारियों की उपलब्धता को देखते हुए अतिरिक्त मानवबल की तैनाती, वैकल्पिक दमकल व्यवस्था और दूरस्थ क्षेत्रों में तेजी से पहुंचने की योजना पर विचार करना जरूरी है. अब देखना होगा कि अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन दुर्गापूजा के दौरान संभावित अग्निकांड से निपटने के लिए किस तरह की तैयारी करते हैं.
रिपोर्ट:मनीष बर्णवाल

