जामताड़ा: जिले में पेयजल समस्या दूर करने के उद्देश्य से 9 से 18 अप्रैल तक चलाए गए पेयजल समस्या निवारण पखवाड़ा के दावों की जमीनी हकीकत मेझिया पंचायत में सवालों के घेरे में आ गई है. प्रशासनिक स्तर पर इसे गंभीर पहल बताया गया और अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया गया, लेकिन हालात अब भी बदहाल हैं.

17 अप्रैल को जामताड़ा प्रखंड के मेझिया और कुशबेदिया पंचायत में निरीक्षण अभियान चलाया गया था, मगर जांच के दौरान सामने आई तस्वीर ने दावों की पोल खोल दी. जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित मेझिया पंचायत में मुख्य सड़क किनारे एक साथ कई चापाकल खराब पड़े मिले. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ चापाकल महीनों से तो कुछ वर्षों से खराब हैं, लेकिन अब तक उनकी मरम्मत नहीं कराई गई. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि निरीक्षण के दौरान इन समस्याओं को नजरअंदाज क्यों किया गया.
स्थिति और गंभीर तब दिखी जब सरकारी संस्थानों में भी पेयजल संकट सामने आया. भेदिया पंचायत अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र लिपीडीह और उत्क्रमित बुनियादी उच्च विद्यालय मेझिया में लगे चापाकल भी खराब पाए गए. यहां बच्चों, शिक्षकों और सेविकाओं को पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
मेझिया पंचायत के उप मुखिया प्रतिनिधि नंदलाल पाल ने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना दी गई और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि लोगों को करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है.
ग्रामीण काशी राय के अनुसार 50 से अधिक लोग एक ही चापाकल पर निर्भर हैं, जबकि आनंद पंडित ने बताया कि एक साल से अधिक समय से चापाकल खराब है. वार्ड सदस्य, मुखिया और विभाग को जानकारी देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है.
यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि निरीक्षण अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया है. यदि जिला मुख्यालय के पास स्थित पंचायत का यह हाल है, तो दूरदराज के गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द खराब चापाकलों की मरम्मत और स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि उन्हें रोजाना पानी के लिए भटकना न पड़े.
Report by Manish Baranwal

