जामताड़ा: सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए भौतिक सत्यापन की व्यवस्था है. लेकिन जामताड़ा जिला अंतर्गत फतेहपुर प्रखंड की सिमलडंगाल पंचायत में इसी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां जीवित वृद्ध महिला विमला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया और इसके बाद उनकी पेंशन बंद हो गई.


पेंशन बंद होने से आर्थिक संकट से जूझ रही विमला देवी आखिरकार अपनी फरियाद लेकर उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचीं. उन्होंने उपायुक्त को बताया कि वह पूरी तरह जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है. रिकॉर्ड में मृत होने के कारण उन्हें मिलने वाली पेंशन भी रोक दी गयी है.
सवाल सिर्फ पेंशन का नहीं, पूरी व्यवस्था का है
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाभुक जीवित थीं तो भौतिक सत्यापन के दौरान उन्हें मृत कैसे घोषित कर दिया गया? क्या सत्यापन महज कागजों पर पूरा कर दिया गया? क्या संबंधित कर्मियों ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की थी? और यदि जांच की गई थी, तो एक जीवित महिला को मृत दर्ज करने की नौबत कैसे आई?
यह गलती महज एक सरकारी रिकॉर्ड की त्रुटि नहीं है. किसी गरीब और वृद्ध लाभुक को सरकारी दस्तावेज में मृत घोषित कर देना उसके अधिकार और सम्मान दोनों पर गंभीर चोट है. पेंशन जैसी छोटी लेकिन जीवनयापन के लिए महत्वपूर्ण राशि बंद होने से लाभुक को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, इसका अंदाजा जिम्मेदार तंत्र को होना चाहिए.
डीसी ने दिए जांच के आदेश
विमला देवी की शिकायत को उपायुक्त ने गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित पंचायत कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

अब जांच में यह सामने आना जरूरी है कि विमला देवी को मृत घोषित करने की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई, रिकॉर्ड में यह प्रविष्टि किसने की और पेंशन बंद करने से पहले क्या निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया गया था.
एक गलती, कई सवाल
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और सही लाभुक की पहचान के लिए सत्यापन व्यवस्था बनाई जाती है. लेकिन यदि यही व्यवस्था किसी जीवित बुजुर्ग को सरकारी कागजों में मृत बना दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि जमीनी स्तर पर सरकारी रिकॉर्ड कितने भरोसेमंद हैं?
विमला देवी का मामला अब केवल उनकी पेंशन बहाली तक सीमित नहीं रह गया है. यह उस पूरी व्यवस्था की परीक्षा है, जहां एक गलत प्रविष्टि किसी जरूरतमंद का सहारा छीन सकती है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. देखना होगा कि यह महज मानवीय भूल साबित होती है या फिर सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की परतें खुलती हैं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

