जामताड़ा: साइबर अपराध के लिए बदनाम रहे जामताड़ा में पुलिस ने एक बार फिर ठगों के खिलाफ शिकंजा कसा है. इस बार पुलिस की कार्रवाई नारायणपुर और करमाटांड़ के दो अलग- अलग ठिकानों पर हुई. छापेमारी में चार युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से नौ मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड मिले हैं. पुलिस अब इन मोबाइल और सिम के जरिए ठगी के पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है.


रविवार को साइबर थाना में प्रेस वार्ता करते हुए साइबर डीएसपी अमित रविदास ने बताया कि पुलिस अधीक्षक को कुछ युवकों के साइबर ठगी में सक्रिय होने की सूचना मिली थी. सूचना के सत्यापन के बाद विशेष टीम बनाई गई और बताए गए ठिकानों पर दबिश दी गई.
स्कूल के बरामदे में मिला एक आरोपी, मैदान से पकड़े गए तीन
उन्होंने कहा पहली कार्रवाई नारायणपुर थाना क्षेत्र के बांका गांव में हुई. उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बरामदे में पुलिस टीम ने छापेमारी कर 28 वर्षीय हासिम अंसारी को पकड़ लिया. दूसरी टीम ने करमाटांड़ थाना क्षेत्र के शीतलपुर मैदान में दबिश दी. यहां से 31 वर्षीय सैयद अंसारी, 26 वर्षीय कोसर अंसारी और 19 वर्षीय अफताब हुसैन को गिरफ्तार किया गया.
चारों के पास से मिले मोबाइल और सिम कार्ड अब पुलिस के लिए जांच की अहम कड़ी हैं. इनकी तकनीकी पड़ताल से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इनका इस्तेमाल किन-किन लोगों से संपर्क करने और किन खातों को निशाना बनाने में किया गया.
‘केनरा बैंक से बोल रहा हूं…’ कहकर शुरू होता था खेल
पुलिस की मानें तो ठगी का तरीका भरोसा जीतने से शुरू होता था. आरोपी खुद को केनरा बैंक का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे. बातचीत के दौरान बैंक से जुड़ी प्रक्रिया का हवाला देकर सामने वाले को झांसे में लेने की कोशिश की जाती थी. ठगी का दूसरा तरीका ₹999 के कैशबैक से जुड़ा था. पुलिस के अनुसार PhonePe पर कैशबैक मिलने का लालच देकर लोगों को उसे स्वीकार करने के लिए कहा जाता था. इसके बाद फर्जी ऐप और तकनीकी तरीकों के सहारे खाते से रकम उड़ाने की कोशिश की जाती थी. यानी महज ₹999 का लालच देकर बैंक खाते तक पहुंच बनाने का खेल चल रहा था.
चार गिरफ्तारी के बाद अब पीछे बैठे चेहरों की तलाश
इस कार्रवाई के बाद पुलिस की जांच का दायरा अब गिरफ्तार चार युवकों से आगे बढ़ रहा है. बरामद सिम किसके नाम पर जारी हुए, मोबाइल में किन लोगों से संपर्क के प्रमाण हैं, ठगी की रकम किन बैंक खातों में जाती थी और उसे निकालने में कौन मदद करता था, इन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है. पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि चारों आरोपी स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे या उनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है.
मामले को लेकर साइबर थाना कांड संख्या 63/26, दिनांक 03.10.2026 दर्ज किया गया है. बीएनएस के साथ आईटी एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
साइबर डीएसपी अमित रविदास ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान जारी रहेगा. पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती जब्त मोबाइल और सिम से मिलने वाली डिजिटल कड़ियों को जोड़कर ठगी करने वालों से लेकर ठगी की रकम ठिकाने लगाने वालों तक पहुंचने की है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

