जामताड़ा: डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के विरोध में जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने आंदोलन का निर्णय लिया है. गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को जिले के व्यापारी ‘नो यूपीआई डे’ मनाएंगे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक घंटे का सामूहिक उपवास कर विरोध दर्ज कराएंगे.


चैंबर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि सरकार और बैंक लगातार डिजिटल इंडिया तथा कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात करते हैं. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर MDR के रूप में अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम है. उन्होंने कहा कि व्यापारी पहले से ही विभिन्न प्रकार के करों और शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं. ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाना व्यापारियों के हित में नहीं है.
डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने की नीति का विरोध
संजय अग्रवाल ने कहा कि एक ओर व्यापारियों को ग्राहकों से अधिक से अधिक डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है. इससे खासकर छोटे दुकानदारों, खुदरा व्यापारियों और मध्यम वर्गीय कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा.
उन्होंने कहा कि व्यापारियों का विरोध डिजिटल भुगतान व्यवस्था से नहीं, बल्कि उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से है. यदि डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है, तो छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त शुल्क का भार डाला जाना चाहिए.
गांधी जयंती पर करेंगे सामूहिक उपवास
चैंबर की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 2 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक व्यापारी सामूहिक उपवास करेंगे. इससे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा. इसके बाद व्यापारी शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से उपवास कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करेंगे.
चैंबर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और उपवास को अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रभावी माध्यम बनाया था. उन्हीं के सिद्धांतों पर चलते हुए व्यापारी वर्ग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाएगा.
सभी व्यापारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील
जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने जिले के छोटे-बड़े दुकानदारों, खुदरा एवं थोक विक्रेताओं तथा उद्योग से जुड़े व्यापारियों से सामूहिक उपवास में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है.
चैंबर ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि व्यापारियों के हितों और निष्पक्ष डिजिटल भुगतान व्यवस्था की मांग को लेकर किया जा रहा है.
चैंबर ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को जिला स्तर से बढ़ाकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा.
2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का आह्वान
गांधी जयंती के अवसर पर विभिन्न व्यापारिक संगठनों की ओर से 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने की अपील की गई है. इसी कड़ी में जामताड़ा के व्यापारी भी डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित MDR शुल्क के विरोध में अपनी एकजुटता प्रदर्शित करेंगे.
चैंबर का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए सुविधाजनक होनी चाहिए. इसके नाम पर व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना स्वीकार्य नहीं होगा
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रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

