जमशेदपुर: जिउतिया पूजा के दौरान मानगो नदी घाट पर हुए हादसे का दुखद अंत हुआ. नदी में लापता 13 वर्षीय पूनम को रविवार को स्थानीय गोताखोरों की टीम ने तलाशी अभियान के दौरान नदी से निकाल लिया. पूनम के मिलने के साथ ही उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए बैठे परिवार में कोहराम मच गया.


शनिवार को जिउतिया पूजा के दौरान पूनम अपनी बहन के साथ मानगो नदी घाट पर स्नान करने गई थी. इसी दौरान दोनों बहनें अचानक पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर डूबने लगीं. मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए एक बहन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था, जबकि पूनम तेज बहाव में लापता हो गई थी.
NDRF के लिए दो बार सड़क पर उतरे परिजन
पूनम के लापता होने के बाद परिजन और स्थानीय लोग लगातार विशेषज्ञ टीम बुलाकर तलाशी अभियान चलाने की मांग कर रहे थे. शनिवार देर रात तक किशोरी का कोई सुराग नहीं मिलने पर आक्रोशित लोगों ने मानगो गोलचक्कर पर सड़क जाम कर दिया था. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को आश्वासन दिया था कि सुबह NDRF की टीम पहुंचकर नदी में तलाशी अभियान चलाएगी. आश्वासन के बाद देर रात जाम समाप्त कर दिया गया था.
परिजनों का आरोप है कि रविवार सुबह काफी समय बीतने के बावजूद NDRF की टीम नहीं पहुंची तो उनका सब्र जवाब दे गया. परिजन और स्थानीय लोग दोबारा मानगो गोलचक्कर पहुंचे और सड़क जाम कर दिया. उनकी मांग थी कि विशेषज्ञ टीम को तत्काल बुलाकर पूनम की तलाश शुरू कराई जाए. इसके बाद स्थानीय गोताखोरों की टीम ने नदी में तलाशी अभियान चलाया और पूनम को नदी से बाहर निकाला.
बन्ना गुप्ता पहुंचे मौके पर, परिवार को दिया सहयोग का भरोसा
घटना की जानकारी मिलने पर राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया. बन्ना गुप्ता ने दुख की इस घड़ी में परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया. उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया.
हादसे ने फिर खड़े किए आपदा प्रबंधन पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर मानगो सहित जमशेदपुर में नदी घाटों पर सुरक्षा और तत्काल जल-बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. लापता किशोरी की तलाश के लिए परिजनों को NDRF बुलाने की मांग लेकर दो बार सड़क जाम करना पड़ा. स्वर्णरेखा और खरकई जैसी नदियों से घिरे जमशेदपुर में किसी व्यक्ति के डूबने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित गोताखोर और तत्काल रेस्क्यू टीम की उपलब्धता का सवाल भी इस घटना के बाद गंभीर हो गया है. पूनम को तो आखिरकार स्थानीय गोताखोरों ने नदी से निकाल लिया, लेकिन घटना प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ गई है कि जल हादसे के बाद विशेषज्ञ बचाव दल के लिए परिजनों को सड़क पर उतरना क्यों पड़े ?
रिपोर्ट: अफ़रोज़ मल्लिक

