जमशेदपुर: झारखंड आंदोलन के महान सेनानी और शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस पर शनिवार को पूरे राज्य में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई. जमशेदपुर में भी विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने शहीद निर्मल महतो को नमन किया. इसी दौरान जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो का एक बयान चर्चा में आ गया है.



मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद विद्युत वरण महतो ने शहीद निर्मल महतो की हत्या के वर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि निर्मल दा की हत्या आज ही के दिन साल 2087 में हुई थी. हालांकि निर्मल महतो की हत्या 8 अगस्त 1987 को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित चमरिया गेस्ट हाउस के समीप हुई थी.
सांसद के इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आम बोलचाल की भाषा में इसे जुबान फिसलना कहा जा सकता है, लेकिन शहीद निर्मल महतो के साथ राजनीतिक रूप से लंबे समय तक जुड़े रहे और उनके आंदोलन के दौर को करीब से देखने वाले सांसद के मुंह से शहादत के वर्ष को लेकर ऐसी गलती होना चर्चा का विषय बन गया है.
हालांकि अपने संबोधन में सांसद विद्युत वरण महतो ने शहीद निर्मल महतो के योगदान और बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि निर्मल दा की हत्या के बाद केवल जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर थी. उन्होंने यह भी कहा कि उस घटना से पूरा देश और बीबीसी तक रोया था.
शहीद निर्मल महतो झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे. 8 अगस्त 1987 को उनकी हत्या के बाद झारखंड आंदोलन को एक नई दिशा मिली और उनके समर्थकों तथा आंदोलनकारियों के बीच उनकी शहादत एक बड़ी प्रेरणा बन गई.
इधर सांसद विद्युत वरण महतो ने देश और झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलनों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने छात्रों के आंदोलन को गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकारों से छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों के मुद्दों का समाधान संवाद और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए.
फिलहाल शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस पर सांसद के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. यह महज जुबान की चूक थी या शहादत के इतिहास को लेकर गंभीर भूल, इस पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.





