जमशेदपुर: महालया के पावन अवसर पर कदमा नागरकोट दुर्गापूजा कमेटी के सक्रिय सदस्य मधुसूदन नंदी एवं उनकी पत्नी सपना नंदी ने श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक महालया श्रवण का विशेष आयोजन किया. इस दौरान बंगाली समुदाय के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ वीरेंद्र कृष्ण भद्र की प्रसिद्ध प्रस्तुति ‘महिषासुरमर्दिनी’ और चंडी पाठ का श्रवण कर मां दुर्गा की आराधना की.


महालया के अवसर पर बंगाली समुदाय में प्रातः चार बजे उठकर वीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज में चंडी पाठ और देवी स्तुति सुनने की विशेष परंपरा रही है. इसी परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से मधुसूदन नंदी और सपना नंदी ने सामूहिक श्रवण की व्यवस्था की. कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने शंखध्वनि की और अगरबत्ती जलाकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की.
महालया से जुड़ी है मां दुर्गा के आगमन की मान्यता
मधुसूदन नंदी एवं सपना नंदी ने बताया कि बंगाली परिवारों में महालया का विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है. इस दिन वीरेंद्र कृष्ण भद्र की ‘महिषासुरमर्दिनी’ प्रस्तुति सुनने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. इसमें देवी दुर्गा की महिमा, उनके आविर्भाव और महिषासुर पर विजय की कथा का वर्णन मिलता है.
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालया के साथ मां दुर्गा के आगमन का आह्वान किया जाता है. मान्यता है कि मां दुर्गा कैलाश पर्वत से पृथ्वी लोक पर आती हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.
महिलाओं ने साझा किया महालया का धार्मिक महत्व
आयोजन में शामिल कॉलोनी की महिलाओं ने भी महालया की परंपराओं और बंगाली संस्कृति में इसके महत्व पर अपने विचार साझा किए. श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मां दुर्गा की आराधना कर परिवार एवं समाज की खुशहाली की कामना की. इस अवसर पर रुमा, तोता, सुतपा, मयना, पिऊ, मौसमी, निवेदिता, कुहु, चित्रा, मिलु, बुबुन, स्वीटी, पीके सिंह, लखींद्र सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे.

