सरायकेला: अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर नेपाल की प्रसिद्ध संस्था शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय था — “शिक्षण को एक सहयोगी पेशे के रूप में पुनर्निर्धारित करें.”

इस वैश्विक आयोजन में देश-विदेश से कुल 2143 शिक्षक और शिक्षिकाओं ने भाग लिया. इनमें से 214 शिक्षकों को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न मानद उपाधि सम्मान से सम्मानित किया गया. जबकि 46 अन्य प्रतिभागियों को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा मित्र सम्मान प्रशस्ति पत्र और प्रमाणपत्र देकर दिया गया.
संस्था के अनुसार, इस प्रतियोगिता का उद्देश्य नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करना, हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के संरक्षण-प्रचार को बढ़ावा देना तथा शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है.
प्रतियोगिता में झारखंड के सिमडेगा के शिक्षक-कवि अंजनी कुमार सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. उत्तर प्रदेश, प्रयागराज की कवयित्री शालिनी बसेड़िया दीक्षित द्वितीय और दिल्ली की डॉ. सुप्रीति चावला तृतीय स्थान पर रहीं. तीनों को प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो, नेपाली टोपी और साझा काव्य संग्रह ‘सबसे प्यारी मेरी हिंदी’ एवं ‘मेरी प्यारी मां’ देकर सम्मानित किया गया.
मध्य प्रदेश के दतिया की शिक्षिका और कवयित्री डॉ. मंजू खरे को संस्था का सर्वोच्च शब्द प्रतिभा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया. उन्हें नकद पांच हजार रुपये की राशि, प्रमाणपत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया.
संस्था के अध्यक्ष आनंद गिरि मायालु ने समापन समारोह में कहा कि शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले ये रचनाकार समाज परिवर्तन के वाहक हैं. संस्था भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक आयोजन करती रहेगी.
प्रतिभा चयन समिति की संयोजक डॉ. मंजू खरे ने बताया कि जनवरी और फरवरी में दो और अंतर्राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने शिक्षकों और कवियों से इसमें भाग लेने का अनुरोध किया.
इस आयोजन में सरायकेला जिले के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय खरसावां के संस्कृत शिक्षक विश्र रंजन त्रिपाठी की सहभागिता और भूमिका भी सराहनीय रही. जिले के शिक्षकों में इस सम्मान को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल है.

