चांडिल: ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है. आजसू पार्टी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी हरेलाल महतो के पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ईचागढ़ में आजसू का अगला राजनीतिक चेहरा कौन होगा ? इसी बीच पूर्व मंत्री एवं आजसू के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहिस की सक्रियता ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. राजनीतिक गलियारों में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में आजसू रामचंद्र सहिस को ईचागढ़ से अपना प्रत्याशी बना सकती है. हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.


हरेलाल महतो ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं और दोनों बार दूसरे स्थान पर रहे. ऐसे में उनका आजसू छोड़ना पार्टी के लिए संगठनात्मक और चुनावी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हरेलाल ने 11 अक्टूबर को भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है. इसके लिए बड़े कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है.
हरेलाल की विदाई से पहले आजसू का शक्ति प्रदर्शन
दिलचस्प बात यह है कि हरेलाल महतो के भाजपा में शामिल होने के कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले, 10 अक्टूबर को आजसू ने ईचागढ़ विधानसभा स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया है. इसकी कमान रामचंद्र सहिस संभाल रहे हैं. इस सम्मेलन को महज संगठनात्मक कार्यक्रम के बजाय बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच आजसू की सक्रियता के रूप में भी देखा जा रहा है. हरेलाल के जाने के बाद पार्टी के सामने स्थानीय संगठन को एकजुट रखने और नए नेतृत्व को आगे लाने की चुनौती है.
जुगसलाई की हार के बाद क्या ईचागढ़ में तलाश रहे नई राजनीतिक जमीन ?
रामचंद्र सहिस की ईचागढ़ में सक्रियता को उनके पुराने विधानसभा क्षेत्र जुगसलाई के चुनावी परिणामों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में जुगसलाई में झामुमो को बड़ी जीत मिली थी.
चुनावी परिणामों को लेकर यह तर्क सामने आता रहा है कि झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के मैदान में उतरने से आजसू को नुकसान हुआ. हालांकि, केवल तीसरे उम्मीदवार की मौजूदगी को हार का कारण मानना चुनावी समीकरणों का अधूरा आकलन होगा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रामचंद्र सहिस अब जुगसलाई के बजाय ईचागढ़ में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं ?
सहिस की सक्रियता महज संगठनात्मक जिम्मेदारी या उम्मीदवारी का संकेत ?
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार रामचंद्र सहिस पिछले कुछ समय से जुगसलाई में अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई दे रहे थे. दूसरी ओर हरेलाल महतो के आजसू छोड़ने के बाद ईचागढ़ में उनकी सक्रियता बढ़ने की बात सामने आ रही है. हालांकि, पार्टी के प्रधान महासचिव होने के नाते किसी विधानसभा क्षेत्र में संगठनात्मक सम्मेलन की जिम्मेदारी संभालना उनकी सामान्य राजनीतिक भूमिका का हिस्सा भी हो सकता है. इसलिए केवल इस सक्रियता के आधार पर उनकी उम्मीदवारी तय मानना उचित नहीं होगा.
जुगसलाई के चुनावी आंकड़े भी दे रहे हैं बहस को नया आधार
2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के मंगल कालिंदी को 1,21,290 वोट मिले थे, जबकि आजसू के रामचंद्र सहिस को 77,845 और जेएलकेएम के विनोद स्वांसी को 36,998 वोट मिले. मंगल कालिंदी की जीत का अंतर 43,445 वोट रहा. दिलचस्प तथ्य यह है कि आजसू और जेएलकेएम के मतों को जोड़ने पर भी कुल 1,14,843 वोट होते हैं, जो झामुमो के मतों से 6,447 कम हैं. हालांकि, यह केवल अंकगणितीय तुलना है. किसी एक प्रत्याशी के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में उसके सभी वोट दूसरे प्रत्याशी को मिल जाते, ऐसा मानना उचित नहीं होगा.
ईचागढ़ में आजसू के अगले कदम पर नजर
फिलहाल हरेलाल महतो के भाजपा में जाने की घोषणा और रामचंद्र सहिस के नेतृत्व में प्रस्तावित आजसू सम्मेलन ने ईचागढ़ की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आजसू स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाती है या किसी वरिष्ठ नेता को ईचागढ़ में संगठन की जिम्मेदारी सौंपती है. रामचंद्र सहिस की उम्मीदवारी फिलहाल राजनीतिक अटकलों का विषय है, पार्टी का घोषित निर्णय नहीं.

