दुमका: जिले के काठीकुंड थाना क्षेत्र में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग आदिवासी छात्रा की मौत के बाद इलाके में भारी आक्रोश है. परिजनों ने छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया है. घटना के विरोध में ग्रामीणों ने मधुबन के पास शव सड़क पर रखकर गोविंदपुर-साहेबगंज हाईवे जाम कर दिया. ग्रामीणों की मांग है कि मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो और दोष साबित होने पर उन्हें कड़ी सजा मिले. प्रशासन ने जांच में तेजी लाने, स्पीडी ट्रायल और नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया में सहयोग का आश्वासन दिया है. आखिर क्या है पूरा मामला और ग्रामीण क्यों हैं आक्रोशित? देखिए यह विशेष रिपोर्ट.


घटना और सड़क जाम
दुमका के काठीकुंड थाना क्षेत्र में एक नाबालिग छात्रा की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करते ग्रामीण, परिजनों की आंखों में आंसू और न्याय की मांग को लेकर उठती आवाजें घटना की गंभीरता बयां कर रही हैं.
जानकारी के मुताबिक, जीतपुर गांव की रहने वाली नौवीं कक्षा की छात्रा स्कूल से घर लौटी थी. खाना खाने के बाद वह मवेशियों को देखने और खोलने के लिए गई थी. परिजनों के अनुसार, काफी देर तक घर नहीं लौटने पर उसकी तलाश शुरू की गई. अगले दिन सुबह करीब आठ बजे उसका शव झाड़ियों के पास मिला.
परिजनों ने छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया है. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली गई. घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई. वे आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं.
हाईवे जाम, प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मधुबन के पास छात्रा का शव सड़क पर रखकर गोविंदपुर-साहेबगंज हाईवे जाम कर दिया. सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. काठीकुंड और गोपीकांदर थाने की पुलिस ग्रामीणों को समझाने और जाम हटाने का प्रयास करती रही, लेकिन ग्रामीण तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे.
जाम हटाने पहुंचे काठीकुंड के बीडीओ सौरभ कुमार ने बताया कि मामले की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है. उन्होंने जल्द कार्रवाई, स्पीडी ट्रायल और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग का आश्वासन दिया.
सौरभ कुमार, बीडीओ, काठीकुंड
उन्होंने कहा कि जांच की प्रक्रिया जारी है और प्रशासन ग्रामीणों से बातचीत कर रहा है. जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने, मामले में त्वरित सुनवाई और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया पर काम करने का भरोसा दिया गया है.
पढ़ाई में तेज थी छात्रा, परिवार ने मांगा न्याय
मृतका की चाची ने बताया कि बच्ची पढ़ाई में बेहद तेज थी. वह नियमित रूप से स्कूल जाती थी और विद्यालय की गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी. परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं. वह अच्छे अंक लाकर आगे बढ़ना चाहती थी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना देख रही थी.
परिजनों का कहना है कि इस घटना से परिवार का भविष्य को लेकर देखा गया सपना टूट गया है. चाची ने मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और दोष साबित होने पर कठोर सजा देने की मांग की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ महीने पहले इलाके में एक
महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई थी, लेकिन परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला. इस पुराने मामले में कार्रवाई की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
मृतका की चाची
“वह पढ़ने में बहुत तेज थी. एक दिन भी स्कूल नहीं छोड़ती थी. टॉपर थी, बहुत अच्छा करती थी. मेरी भतीजी के लिए न्याय चाहिए. आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उन्हें कड़ी सजा मिले.”
छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल
विद्यालय के शिक्षक सिराज अंसारी ने घटना को बेहद जघन्य बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांवों से बच्चियां चार से पांच किलोमीटर तक का सफर तय कर स्कूल आती हैं. ऐसी घटनाओं से छात्राओं और अभिभावकों में भय पैदा होना स्वाभाविक है.
शिक्षक ने बच्चियों को समूह में आने-जाने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि विद्यालय में छात्राओं के लिए आत्मरक्षा कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है. हालांकि, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और समाज को भी सक्रिय होना होगा.
सिराज अंसारी, शिक्षक
“यह बहुत ही जघन्य अपराध है. जो भी इसमें संलिप्त हैं, उन्हें जल्द पकड़ा जाए और कानूनी सजा मिले. बच्चियां दूर-दूर से पढ़ने आती हैं. अब उनके अभिभावकों के मन में डर रहेगा. बच्चियों को समूह में आना-जाना चाहिए और प्रशासन को भी गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए.”
विद्यालय अध्यक्ष ने भी जताई चिंता
विद्यालय के अध्यक्ष फारूक अनवर ने भी घटना पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि यह पहाड़ी और दूर-दराज का इलाका है, जहां कदमा, अस्ताजोड़ा, बड़ा चुरपिया, पिपरा और भुरकुंडा समेत कई पंचायतों से छात्राएं पढ़ने आती हैं. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया है.
उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. साथ ही मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक आधार पर कराने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की अपील की.
फारूक अनवर, विद्यालय अध्यक्ष
“प्रशासन को सक्रिय होना होगा. शिक्षा विभाग को भी मेहनत करनी होगी. अगर बच्चों के मन से डर नहीं निकलेगा, तो वे पढ़ाई कैसे करेंगे? इस जघन्य अपराध के आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और स्पीडी ट्रायल होना चाहिए.”
छात्र नेताओं ने की कड़ी सजा की मांग
घटना के बाद छात्र नेताओं और स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश देखने को मिला. छात्र नेता राजीव बास्की ने कहा कि मासूम बच्ची के साथ हुई इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है. उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से सवाल किया कि आखिर बेटियों के खिलाफ ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं.
वहीं, छात्र नेता राजेंद्र मुर्मू ने पीड़ित परिवार के छोटे बच्चों की निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करने की मांग की. उन्होंने कहा कि परिवार को बच्ची से भविष्य में आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब परिवार के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है.
छात्र नेताओं ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को सहायता देने, छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई की व्यवस्था करने, आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और मामले का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने की मांग की.
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले हुई कथित घटना में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अपराधियों का मनोबल बढ़ा.
मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, डीआईजी और एसपी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. ऐसे गंभीर मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी और जांच की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है.
न्याय और सुरक्षा की मांग
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मासूम बच्ची को न्याय कब मिलेगा? ग्रामीणों की मांग है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और दोष साबित होने पर कानून के अनुसार कठोरतम सजा दी जाए. साथ ही पीड़ित परिवार को उचित सहायता मिले और क्षेत्र की बच्चियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाए.
अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. दुमका से इस घटना ने एक बार फिर बच्चियों की सुरक्षा, न्याय में तेजी और ग्रामीण इलाकों में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

