चाईबासा/ Jyotish Mahali जिले के

मांझारी प्रखंड अंतर्गत पांगा पंचायत के टेंगरा गांव स्थित लोवागोड़ा और जोबासाई टोला में पिछले एक वर्ष से चापाकल और जलमीनार खराब पड़े हैं. इसके कारण ग्रामीणों को पीने के लिए चुवां यानी झरना का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है. स्वच्छ पेयजल की सुविधा नहीं होने से आदिवासी बहुल इन इलाकों में लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है. गर्मी बढ़ने के साथ समस्या और विकराल हो गई है. दूषित पानी के सेवन से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल ने इस गंभीर मामले को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है. उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में गंदा पानी कई बीमारियों की जड़ बनता है. दूषित पानी पीने से लोग गंभीर रोगों से ग्रसित हो रहे हैं. उचित इलाज के अभाव में कई बार लोग अंधविश्वास और पूजा-पाठ के चंगुल में फंस जाते हैं, जिससे डायन के नाम पर हिंसा जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं.
उन्होंने बताया कि पांगा पंचायत ही नहीं, बल्कि पूरे प्रखंड के सैकड़ों गांव और टोलों में स्वच्छ पेयजल का अभाव है. लोग नदी, नाला और चुवां का पानी पीने को मजबूर हैं. इससे स्वास्थ्य संकट लगातार गहराता जा रहा है.
जिला परिषद सदस्य ने उपायुक्त, मुख्यमंत्री तथा कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल को आवेदन भेजकर सभी खराब चापाकल और जलमीनारों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है.
साथ ही गांधी टोला स्थित जिला स्तरीय पेयजल जांच प्रयोगशाला में पानी का सैंपल भी जमा कराया गया है, ताकि पानी की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पहल कर स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में बीमारियों और अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं पर रोक लग सके.

