जमशेदपुर: महालया के पावन अवसर पर सोनारी ईस्ट लेआउट बटतल्ला स्थित सार्वजनीन दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से पूजा मैदान में ‘आगमनी’ संगीत अनुष्ठान का आयोजन किया गया. प्रातः चार बजे प्रभात फेरी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक बंगाली आगमनी गीतों की प्रस्तुति देकर मां दुर्गा के आगमन का स्वागत किया. भक्ति गीतों से पूरा पूजा परिसर भक्तिमय हो उठा.


कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने ‘ओगो आमार आगमनी’ और ‘शिशिरे शिशिरे शारद ओ प्रभाते’ सहित कई पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए. महालया के अवसर पर आयोजित इस अनुष्ठान में बंगाली संस्कृति और दुर्गापूजा की परंपराओं की झलक देखने को मिली.
58वें वर्ष में भव्य काल्पनिक मंदिर का निर्माण
सोनारी बटतल्ला दुर्गा पूजा कमेटी इस वर्ष अपने आयोजन का 58वां वर्ष मना रही है. समिति के संयुक्त सचिव स्वपन मुखर्जी ने बताया कि इस बार पूजा पंडाल को भव्य काल्पनिक मंदिर का स्वरूप दिया जा रहा है. पंडाल की ऊंचाई लगभग 35 फीट और चौड़ाई 60 फीट होगी.
समिति की ओर से पंडाल की साज-सज्जा और प्रतिमा निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को आकर्षक पूजा आयोजन देखने को मिले.
कोलकाता के प्रशांत पाल ने बनाई 18 फीट ऊंची प्रतिमा
समिति के संयुक्त कोषाध्यक्ष अभिजीत सेनगुप्ता ने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा की 18 फीट ऊंची प्रतिमा कोलकाता के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रशांत पाल ने तैयार की है. प्रशांत पाल को मूर्ति निर्माण के क्षेत्र में सरकारी पुरस्कार भी मिल चुके हैं.
उन्होंने बताया कि प्रतिमा बनकर तैयार हो चुकी है और जमशेदपुर स्थित पूजा पंडाल में पहुंच गई है. इस वर्ष मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा पूजा आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगी.
मेदिनीपुर से आएंगे ढाकी, तीन दिनों तक बंटेगा महाप्रसाद
समिति के संयुक्त सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि दुर्गापूजा के पारंपरिक वातावरण को बनाए रखने के लिए पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से ढाकी बुलाए जा रहे हैं. ढाक की पारंपरिक धुनों के बीच मां दुर्गा की आराधना की जाएगी. उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान लगातार तीन दिनों तक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा.
पंचमी को होगा पूजा पंडाल का उद्घाटन
समिति के अनुसार, पूजा पंडाल का उद्घाटन पंचमी के दिन भारत सेवाश्रम संघ के सचिव स्वामी मुक्तात्मानंद महाराज एवं मुरारी गोयल द्वारा किया जाएगा. आयोजन समिति ने बताया कि दुर्गापूजा को लेकर तैयारियां जारी हैं. इस वर्ष भव्य प्रतिमा, मंदिर के स्वरूप वाला पंडाल, पारंपरिक ढाक वादन और महाप्रसाद वितरण आयोजन की प्रमुख विशेषताएं होंगी.

